PM ने कुडलकुलम-1 इकाई को किया राष्ट्र को समर्पित

Aug 11, 2016

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रूस के सहयोग से शुरू की गई कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना (केकेएनपीपी) की 1000 मेगावाट की पहली इकाई को राष्ट्र को समर्पित की.

नयी दिल्ली से मोदी ने, मॉस्को से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चेन्नई से तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बुधवार को कुडनकुलम परियोजना की पहली इकाई राष्ट्र को समर्पित की.

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा, यह भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है. इस इकाई के कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया जाना भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी का उदाहरण ही नहीं है बल्कि यह हमारी पुरानी मित्रता का उत्सव भी है. परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के आपसी सहयोग की बदौलत यह परियोजना शुरू हो पायी है. आमतौर पर लोगों को नहीं पता होगा कि कुडनकुलम-1 देश की सबसे बड़ी विद्युत इकाई है. इस परियोजना के तहत अभी एक-एक हजार मेगावाट की पाँच से अधिक इकाइयाँ बनाने की योजना है.

मोदी ने ऐसी परियोनाओं के बीच पर्यावरण संरक्षण के महत्व का उल्लेख करते हुये कहा कि मानव विकास की कहानी प्रौद्योगिकी के फायदे और इसके बल पर बढ़ी आर्थिक समृद्धि का तानाबाना है और यह पर्यावरण को बिना क्षति पहुँचाये पूर्ण होती है. हमारे पास देश के लिए एक दृष्टिकोण है जिसमें अपनी मातृभूमि का सम्मान करते हुये आर्थिक विकास के लक्ष्यों को हासिल करना और स्वच्छ ऊर्जा के जरिये औद्योगिक विकास को गति देना शामिल है.

पुतिन ने कहा, ताशकंद में हुये समझौते के अनुसार आज केकेएनपीपी की पहली इकाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया. यह अवसर हमारे साझेदार देश भारत और इस परियोजना के लिए कार्यरत रूसी कंपनियों के लिए समारोह की तरह है. इसे दोनों देशों के विशेषज्ञों के सम्मिलित प्रयास और दुनिया की सर्वाधिक उन्नत प्रौद्योगिकी की मदद से तैयार किया गया है.

उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग दोनों देशों के बीच की रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है. इस क्षेत्र में हमारे प्रयास रूस के विकास के लिए महत्वपूर्ण है. यह साझेदारी केवल परमाणु संयंत्र का निर्माण और इसका परिचालन शुरू करने के लिए नहीं है बल्कि यह भारत में नयी उच्च प्रौद्योगिकी आधारित परमाणु क्षेत्र के विकास के लिए वृहद् पैमाने पर तैयार होने वाली परियोजना है.

मोदी ने इस परियोजना पर काम कर रहे दोनों देशों के अभियंताओं, वैज्ञानिकों और तकनीशियनों को धन्यवाद देते हुये कहा कि यह उनके लिए यह खुशी का अवसर है. उन्होंने कहा, मैं उनकी लगन और कड़ी मेहनत को सलाम करता हूँ, जिनकी वजह से इस इकाई का काम सफलतापूर्वक पूरा हो पाया.

जयलिलता ने दुनिया में सर्वाधिक तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश भारत में ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुये केकेएनपीपी की दूसरी इकाई को शीघ्र पूरा किये जाने को जरूरी बताया और कहा कि इस परियोजना की पहली इकाई भारत और रूस के बीच पुरानी मित्रता और मजबूत द्विपक्षीय सहयोग का प्रतीक है.

उन्होंने कहा, स्वच्छ ऊर्जा तेजी से बढ़ने वाले तमिलनाडु जैसे राज्यों की आर्थिक विकास की गति को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण है. केकेएनपीपी परियोजना परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत-रूस के आपसी सहयोग की दिशा में मील का पत्थर है.

उल्लेखनीय है कि केकेएनपी देश की सबसे बड़ी और सर्वाधिक उन्नत असैन्य परमाणु कार्यक्रम है जो रूसी विशेषज्ञों की मदद से पूरा किया जा रहा है.  बीस नवंबर 1988 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने 1000 मेगावाट क्षमता वाले दो वीवीईआर रिएक्टरों के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था लेकिन सोवियत संघ के विघटन तथा रुपया-रूबल भुगतान अनुपात को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद के कारण यह परियोजना एक दशक से अधिक समय तक अधर में लटकी रही.

भारत और रूस के बीच मतभेद दूर होने के बाद 21 जून 1998 को केकेएनपीपी परियोजना पर दोबारा काम शुरू हुआ और 31 मार्च 2002 को संयंत्र की पहली इकाई का निर्माण कार्य शुरू हुआ. इसके बाद भी स्थानीय लोगों के विरोध-प्रदर्शन और कुछ अन्य कारणों से इसके निर्माण में देरी होती चली गयी.

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