कोहिनूर चुराया और छीना नहीं गया कोहिनूर इनाम में दिया गया था : केंद्र

Apr 19, 2016

दुनिया के सबसे कीमती हीरे ‘कोहिनूर’ को लेकर सदियों से चली आ रही कहानियों पर केंद्र सरकार ने विराम लगा दिया है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ब्रिटिश हुकूमत ने कोहिनूर को न तो चुराया और न ही उसे छीना. पंजाब के शासकों ने यह हीरा ईस्ट इंडिया कंपनी को इनाम में दिया था.

..तो खाली हो जाएंगे हमारे संग्रहालय

सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस उदय उमेश ललित की बेंच को बताया कि कोहिनूर को जबरन लिया हुआ या चुराया हुआ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वर्ष 1849 में महाराजा रंजीत सिंह के उत्तराधिकारियों ने सिख युद्ध में उनकी मदद के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी को इनाम के तौर पर दिया था.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि सरकार वि में सबसे कीमती हीरों में से एक कोहिनूर पर दावा जताने की इच्छुक है या नहीं.

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि संसद में कई बार कोहिनूर हीरा वापस लाने की मांग उठी है. उन्होंने कहा कि अगर हम अन्य देशों से कोहिनूर जैसी हमारी कीमती वस्तुओं पर दावा करते हैं तो हर दूसरा देश हम से अपने सामानों पर दावा करना शुरू कर देगा. हमारे संग्रहालयों में कुछ नहीं बचेगा.

 

कोर्ट ने पूछा दो टूक सवाल

अदालत ने कहा कि हम जानना चाहेंगे कि क्या सरकार दावा जताना चाहती है. देखिए, हम इस अनुरोध को खारिज करने के इच्छुक नहीं हैं. अगर हम इसे खारिज करते हैं तो ब्रिटेन कह सकता है कि आपके सुप्रीम कोर्ट ने अनुरोध खारिज कर दिया और इससे सरकार के कानूनी दावा नामंजूर होने की तरफ बढ़ सकता है.

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