जानिए- क्या है बोन मेरो और कैसे किया जाता है इसका दान

Apr 29, 2017
जानिए- क्या है बोन मेरो और कैसे किया जाता है इसका दान

बोन मैरो हमारी हड्डियों के अंदर पाया जाता है। यह हमारी हड्डियों के अंदर भरा हुआ एक मुलायम टिशू होता है। जहां से हमारे रक्त का उत्पादन होता है। एक व्यस्क के शरीर में बोन मैरो का भार लगभग 4% समाहित रहता है। यानी कि लगभग 2.6 किलोग्राम। बीने मेरो रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करने वाली स्टेम कोशिकाओं से भरी रहती है जो लाल, सफेद कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को विकसित करती है। सफेद रक्त कोशिकाएं प्रतिरक्षा की प्रणाली संक्रमण से लड़ने में हमारी मदद करते हैं जबकि लाल रक्त कोशिकाएं हमारे पूरे शरीर को ऑक्सीजन प्रदान करती है। प्लेटलेट्स रिसाव को रोकने के लिए रक्त का थक्का बनाते हैं। बोन मैरो स्टेम कोशिकाओं को शरीर की जरूरत के अनुसार ही अलग अलग प्रकार की कोशिकाओं को विकसित करते हैं।

कई बीमारियों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए एक वरदान है। इसके साथ ही साथ संभंधित जैसे एनीमिया आदि में भी बोन मैरो ट्रांसप्लांट काफी मददगार होता है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए लोगों को जागरूक होना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। पहले की अपेक्षा आज के जमाने में लोग बोन मैरो ट्रांसप्लांट को लेकर सजग हो रहे हैं। भारत में डोनर की संख्या 13000 से बढ़कर दो लाख तक पहुंच चुकी है। इस कार्य को एनजीओ की मदद से भी काफी ज्यादा प्रोत्साहित किया जाने लगा है।

बोन मैरो देना बहुत आसान है। कुछ लोग इस बात से घबरा जाते हैं कि बोन मैरो काफी पीड़ादायक होगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता है। सबसे पहले मुंह से सैंपल लिया जाता है। जिससे गाल के अंदरुनी हिस्से से एक सॉफ्ट टिश्यू निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान आपको किसी भी तरह का कोई दर्द नहीं होता है। स्टेम सेल्स का उचित मिलान होने पर व्यक्ति का पूरा मेडिकल चेकअप किया जाता है और उस मेडिकल चेकअप के द्वारा उससे जुड़ी पूरी जानकारी दी जाती है।

इसके बाद डोनर की हड्डी में बिना छेद किए परिधीय रक्त को स्टेम सेल्स की मदद से निकाला जाता है। डोनर को 4 से 5 दिन के लिए पीसीएस थेरेपी दी जाती है। ऐसा करने से बोन मैरो में जरूरत से अधिक स्टेम कोशिकाओं का उत्पादन होने लगता है। जी सीएसपी के दौरान डोनर को शरीर में हल्का सा दर्द होता है। इसके अलावा सिर दर्द भी होता है। लेकिन यह सारी थैरपी किसी सुपरवाइजर की देखरेख में ही होती है। इस प्रक्रिया में लगभग 4 से 8 घंटे लगते हैं। कुछ घंटों के आराम के बाद दोनों को घर भेज दिया जाता है।

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