जानिए- अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़ी कुछ बेहद खास बातें, जो जानकर चौक जाएंगे आप

Apr 30, 2017
जानिए- अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़ी कुछ बेहद खास बातें, जो जानकर चौक जाएंगे आप

लोग घूमने के लिए न जाने कैसे-कैसे जगह पर जाना पसंद करते हैं। लोग घूमने के लिए अलग अलग तरह की जगह पर जाते हैं। ऐसी ही एक जगह अजमेर शरीफ। राजस्थान में बसी इस दरगाह की बहुत ही ज्यादा मान्यता है। इस दरगाह में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की कब्र है। जो सन 1992 में सुल्तान सहाबुद्दीन के साथ भारत में आए थे और भारत में आकर वो अजमेर में ही बस गए थे। ऐसा माना जाता है कि उनके पास कई तरह की चमत्कारी शक्तियां थी । जिस वजह से उनके नाम पर आज भी दरगाह में लोग दूर-दूर से आते हैं। अजमेर शरीफ आने वाले लोगों की हर मुराद पूरी होती है। अजमेर शरीफ दरगाह देखने में भी बहुत ही ज्यादा सुंदर है। आइए आज आपको इस खूबसूरत दरगाह के बारे में कुछ खास बातें बताते है।

निजामगेट
अजमेर शहर ऊंची ऊंची पहाड़ियों के बीच में बसा हुआ शहर है और इस शहर के बीचों बीच स्थित है या खूबसूरत दरगाह। ख्वाजा पीर की इस दरगाह में प्रवेश चारों ओर से है। जिसमें से सबसे ज्यादा खूबसूरत और आकर्षित दरवाजा मुख्य बाजार की ओर है। यह दरवाजा निजाम गेट के नाम से पूरे शहर में मशहूर है। यह दरवाजा साल 1912 में बनना शुरु हुआ था। और इसे बनते-बनते लगभग 3 साल लग गए। इस दरवाजे की ऊंचाई 70 फुट है और इस दरवाजे की चौड़ाई 24 फुट है।

दरवाजा नक्कारखाना
दरवाजा नक्कारखाना काफी पुराने तरीके से बनाया गया है। इस दरवाजे के ऊपर शाही जमाने का नक्कारखाना है । नक्कारखाना दरवाजा शाहजहां ने 1047 में बनवाया था। इसलिए इस दरवाजा को नक्कारखाना शाहजहानी के नाम से भी जाना जाता है।

चार यार की मजार
जामा मस्जिद के दर्शन दीवार के साथ ही एक छोटा सा दरवाजा है। यह छोटा सा दरवाजा पश्चिम की ओर खुलता है। इस दरवाजे से बाहर आते ही काफी बड़ा कब्रिस्तान है। जहां पर बड़े-बड़े सूफिया फकीरों और आलिमों की मजार है। इस कब्रिस्तान में उन चारों बुजुर्ग लोगों की भी कब्रे हैं जो हजूर गरीब नवाज के साथ यहां आए थे। इसी कारण इसे चार यार भी कहा जाता है । यहां पर हर साल बहुत बड़ा मेला लगता है। इस मेले में दूर-दूर से लोग आते हैं ।

अकबरी मस्जिद
जैसा कि नाम से ही पता लगता है अकबरी मस्जिद अकबर के जमाने की यादगार मस्जिद है। सलीमा और शाहजहां के जन्म पर बादशाह अकबर अजमेर से यहां पर आए थे और उसी समय उन्होंने यहां पर इस मस्जिद के निर्माण का आदेश दिया।

सोने का चिराग
बुलंद दरवाजा के आगे बढ़ते ही एक बड़ा सा वुमन की तरह सुंदर सी छतरी है। इसमें एक बहुत पुराने प्रकार के पीतल का चिराग रखा गया है। इस चिराग को सेना का चिराग भी कहा जाता है। एक बार मुगल बादशाह अकबर ने यह प्रतिज्ञा की थी कि जब वह चित्तौड़गढ़ से युक्त जीत जाएंगे तो वह अजमेर दरगाह में एक बड़ी देग का दान करेंगे और यह देग इतनी बड़ी है कि इस देश में सवा सौ मन चावल पक सकते हैं।

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>