जानिए: पाकिस्तान सहित इन देशों में पहले से ही BAN है तीन तलाक….

Aug 22, 2017
जानिए: पाकिस्तान सहित इन देशों में पहले से ही BAN है तीन तलाक….

आज भारत में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इस मामले में केंद्र सरकार संसद में कानून बनाए। इसके लिए मुस्लिम महिलाओं को काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। जबकि दुनिया के तमाम मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर काफी लंबे समय से रोक लगी हुई है।

बता दें कि भारत में सुप्रीम कोर्ट ने आज तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया है। जबकि ऐसे कई मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर बैन है। यहाँ उनके नाम दिए जा रहे है पढ़िए…….

पाकिस्तान:
साल 1961 में पाकिस्तान में तीन तलाक को गैरकानूनी बताते हुए ‘मुस्लिम फैमिली लॉ ऑर्डिनेंस’ का ऐलान किया गया। जिसके तहत जो भी शख्स अपनी पत्नी से तलाक चाहता हो तो उसे ‘लोक काउंसिल’ के चेयरमैन को नोटिस भेजना होगा। और उसके साथ-साथ इस नोटिस की कॉपी अपनी पत्नी को भी देनी होगी। जिसके 30 दिन बाद ‘काउंसिल’ पति-पत्नी के बीच समझौते की कोशिश करती है। और फिर 90 दिनों तक इंतजार किया जाता है अगर उसके बाद भी समझौता नहीं हो पाता तो फिर इनका तलाक माना जाता है। जिसके तहत पत्नी निकाहनामे में तलाक लेने के अपने अधिकार को भी निर्धारित कर सकती है।

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अल्जीरिया:
जबकि एक और देश अल्जीरिया में तलाक का फैसला सिर्फ और सिर्फ कोर्ट में ही होता है। इस में दोनों पक्षों के बीच एक बार समझौते की कोशिश की जाती है। और उनको तीन महीने का वक्त भी दिया जाता है, अगर इस बीच उनका आपस में समझौता नहीं हो पाता तो फिर कोर्ट से इसका फैसला होता है।

मिस्र:
मिस्र भी एक मुस्लिम देश है यहाँ पर 1929 में तलाक लेने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया। ये कानून 13वीं सदी के इस्लामिक विद्वान इब्न तयमियाह द्वारा की गई कुरान की व्याख्या पर आधारित है। जिसके तहत एक ही बार में तीन बार तलाक बोलने (तलाक-तलाक-तलाक) को भी एक ही तलाक माना जाता है। यानी इसे तीन स्तरीय तलाक प्रक्रिया का पहला स्टेप माना जाता है। इस तरह पहला तलाक कहने के बाद दोनों पक्षों को 90 दिन का इंतजार करना पड़ता है। उसके बाद ही फैसला सुनाया जाता है।

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ट्यूनीशिया:
यहाँ ट्यूनीशिया में तीन तलाक पर बैन 1956 से है। जिसका फैसला सिर्फ और सिर्फ कोर्ट के जरिए ही हो सकता है। इस में कोर्ट पहले दोनों पक्षों को सुलह का समय देता है। जिसके बाद ही अपना फैसला सुनाता है।

बांग्लादेश:
जब 1971 में बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हुआ। तभी से उसने तलाक को लेकर वही कानून बनाये जो पाकिस्तान में जारी है।

तुर्की और साइप्रस:
1926 में तुर्की में मुस्तफा कमाल अतातुर्क की लीडरशिप में स्विस सिविल कोड अपनाया। जहाँ ये कानून यूरोप में सबसे प्रगतिशील माना जाता है। इसके जारी होने के बाद शादी और तलाक से जुड़े इस्लामी कानून खुद ब खुद खत्म हो जाते हैं। और दूसरी तरफ 1980 में साइप्रस ने भी तुर्की में जारी इस कानून को अपने देश में जारी कर दिया।

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सूडान:
यहाँ सूडान में भी मिस्र में लागू तलाक की कानून प्रक्रिया को फॉलो किया जाता है। हालांकि, इस में कुछ नए प्रावधान भी जोड़े गए हैं। यहाँ तलाक होने के बाद इद्दात की एक अवधि दी जाती है, जिसमें महिला के पीरियड्स की तीन साइकिल गुजर जाएं। उसके बाद कोर्ट अपना ऑफिशियल डॉक्युमेंट तैयार करती है और सरकार तलाक की मंजूरी दे देती है।

इंडोनेशिया:
इंडोनेशिया में भी तलाक सिर्फ-सिर्फ कोर्ट में ही किया जाता है। यहाँ पर मैरिज रेग्युलेशन के आर्टिकल 19 के तहत जायज कारण के आधार पर ही ये तलाक दिया जा सकता है।

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