खंडवा वाले आवाज के जादूगर किशोर कुमार

Aug 04, 2016

खंडवा- भारतीय फ़िल्म जगत के हरफनमौला कलाकार स्व. किशोर कुमार की आज 87वीं जयंती गुरुवार (4 अगस्त) धूमधाम से मनाई जा रही है। खंडवा में इंदौर रोड स्थित किशोर दा की समाधि स्थल पर सुबह 10 बजे किशोर प्रेमियों ने दूध-जलेबी का भोग लगाया और गीतांजलि दी। इस दिन खंडवा में बनी उनकी समाधि पर देश भर से हजारों की संख्या में उनके प्रशसंक माथा टेकने पहुँचते है। उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक उनका पार्थिव शरीर मुम्बई से खंडवा लाया गया और मातृभूमि पर उनका अंतिम संस्कार किया गया । उनके चाहने वालोँ ने उसी जगह उनकी समाधि बना दी जो आज तक पूजी जा रही है । बाद में सरकार ने यहाँ एक भव्य स्मारक बनवा दिया जो जो एक दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।

करियर की शुरुआत किशोर कुमार के फिल्मी करियर की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में वर्ष 1946 में फिल्म ‘शिकारी’ से हुई। इस फिल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फिल्म ‘जिद्दी’ से। इस फिल्म में उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया। वह के. एल. सहगल के बहुत-बड़े प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने यह गीत उनकी शैली में ही गाया।

किशोर कुमार की आवाज राजेश खन्ना पर बेहद जमती थी। राजेश फिल्म निर्माताओं से किशोर से ही अपने लिए गीत गंवाने की गुजारिश किया करते थे। जब किशोर कुमार नहीं रहे तो राजेश खन्ना ने कहा था कि “मेरी आवाज चली गई। ”

मोहब्बत में बने थे मुस्लिम ! किशोर के गानों में मोहब्बत की अलग ही झलक दिखाई देती है। उसी प्रकार उनके दिल में भी मोहब्बत का एक अलग मुकाम था। वैसे तो उनकी चार शादियां हुई थी। लेकिन मशहूर अभिनेत्री मधुबाला जिनके मोहब्बत में आशिक हुए थे किशोर। जिन्होंने मोहब्बत के खातिर मधुबाला संग शादी करने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर इस्लामिक नाम ‘करीम अब्दुल’ रखा। जिससे उन्होंने साबित कर दिया था कि मोहब्बत कोई मजहब नहीं देखती !

किशोर की मातृभूमि खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में गांगुली परिवार में जन्मे किशोर कुमार के पिता का नाम कुंजालाल गांगुली और माता का नाम गौरी देवी था। उनके बचपन का नाम आभास कुमार गांगुली था। चार अगस्त, 1929 को जन्मे आभास कुमार ने फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान किशोर कुमार के नाम से बनाई। वह अपने भाई बहनों में सबसे छोटे थे।

उनके पिता कुंजीलाल खंडवा के बहुत बड़े वकील थे। किशोर कुमार को अपनी जन्मभूमि से काफी लगाव था। वह जब किसी सार्वजनिक मंच पर या किसी समारोह में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करते तो शान से खंडवा का नाम लेते। अपनी जन्मभूमि और मातृभूमि के प्रति ऐसा जज्बा कम लोगों में देखने को मिलता है। मशहूर अभिनेता अशोक कुमार उनके सबसे बड़े भाई थे। अशोक कुमार से छोटी उनकी बहन और उनसे छोटा एक भाई अनूप कुमार था। जब अनूप कुमार फिल्मों में अभिनेता के तौर पर स्थापित हो चुके थे, तब किशोर कुमार बच्चे थे।

वह बचपन से ही मनमौजी थे। उन्होंने इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई की थी। उनकी आदत थी कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद भी खाना और दोस्तों को भी खिलाना। किशोर कुमार पर जब कैंटीन वाले के पांच रुपये बारह आना उधार हो गए और कैंटीन मालिक उन्हें उधारी चुकाने को कहता तो वह कैंटीन में बैठकर टेबल पर गिलास और चम्मच बजा-बजा कर पांच रुपया बारह आना गा-गा कर कई धुन निकालते थे और कैंटीन वाले की बात अनसुनी कर देते थे। बाद में उन्होंने अपने इस गीत का खूबसूरती से इस्तेमाल किया, जो काफी हिट हुआ।

इस हादसे ने बनाया सुरीला किशोर लेकिन क्‍या आप यकीन करेंगे कि आभास कुमार गांगुली यानी फिल्‍मी दुनिया के किशोर कुमार बचपन में ‘बेसुरे’ थे। उनके गले से सही ढंग से आवाज नहीं निकलती थी लेकिन एक हादसे में उनके गले से इतनी ‘रियाज’ करवाई कि वे सुरीले बन गए। किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार ने एक इंटरव्‍यू में बताया था कि किशोर का पैर एक बार हंसिए पर पड़ गया। इससे पैर में जख्‍म हो गया। दर्द इतना ज्‍यादा था कि किशोर कई दिन तक रोते रहे। इतना रोये कि गला खुल गया और उनकी आवाज में ‘जादुई असर’ आ गया।

खंडवा था किशोर की दीवानगी ! किशोर दा को खंडवा से बड़ा लगाव था । वह जब भी खंडवा आते थे अपने दोस्तों के साथ शहर की गलियो चौपालो पर गप्पे लड़ाना नहीं भूलते थे। उन्हें जलेबी खाने का बड़ा शोक था।उनकी ज्यादातर महफ़िल जलेबी की दुकान पर ही सजती थी। उनका जीवन एक आम आदमी के सामान था उसमे एक स्टार होने का घमंड नहीं था। यही वजह है कि उनकी समाधी पर जाने वाले उनके फेन दूधजलेबि का भोग लगाने के बाद ही श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वह भी एक गाना गाकर।

किशोर की हुई चार शादियां किशोर कुमार ने चार शादियां की. उनकी पहली शादी रुमा देवी से हुई थी, लेकिन आपसी अनबन के कारण जल्द ही उनका तलाक हो गया। इसके बाद, उन्होंने मधुबाला के साथ शादी रचाई। मधुबाला संग शादी करने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर इस्लामिक नाम ‘करीम अब्दुल’ रखा। फिल्म ‘महलों के ख्वाब’ से दोनों एक-दूसरे के करीब हुए थे, लेकिन नौ साल बाद मधुबाला ने दुनिया के साथ उन्हें भी अलविदा कह दिया।

किशोर ने 1976 में अभिनेत्री योगिता बाली के साथ शादी की। लेकिन यह शादी भी ज्यादा दिन तक नहीं चल सकी। योगिता ने 1978 में उनसे तलाक लेकर मिथुन चकवर्ती के साथ सात फेरे लिए। वर्ष 1980 में उन्होंने चौथी और आखिरी शादी लीना चंद्रावरकर से की। उनके दो बेटे हैं।

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