दुनिया को अलविदा कह गईं किशोरी अमोनकर

Apr 04, 2017
दुनिया को अलविदा कह गईं किशोरी अमोनकर

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रख्यात गायिका और सुपरहिट फिल्म ‘गीत गाया पत्थरों ने’ में अपनी आवाज देने वाली किशोरी अमोनकर सोमवार देर रात दुनिया से रुखसत हो गईं। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर सहित शास्त्रीय संगीत व मनोरंजन जगत की हस्तियों और बड़ी संख्या में उनके प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

मुंबई में जन्मीं किशोरी अमोनकर ने अपने 85वें जन्मदिन के महज एक हफ्ते पहले दादर पश्चिम (मुंबई) स्थित घर में अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर दर्शन के लिए दादर के एक ऑडिटोरियम में रखा जाएगा, जहां हजारों संगीत-प्रेमी उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।

किशोरी लगभग सात दशक तक गायन क्षेत्र में सक्रिय रहीं। उन्हें ‘गान-सरस्वती’ का दर्जा दिया गया।

जयपुर घराने से ताल्लुक रखने वाली किशोरी अमोनकर को पद्म विभूषण सहित कई सम्मानों से नवाजा गया।

किशोरी अमोनकर के घर में उनके दो बेटे व पोते-पोतियां हैं। उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है।

अमोनकर के निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “उनका जाना भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए अपूरणीय क्षति है। वह अपने काम के जरिये आने वाले वर्षो में भी लोगों के बीच लोकप्रिय बनी रहेंगी।”

भारतरत्न लता मंगेशकर ने किशोरी अमोनकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “वह बेहतरीन शास्त्रीय गायिका थीं। उनके निधन से संगीत क्षेत्र को भारी क्षति हुई है।”

शबाना आजमी, श्रेया घोषाल, हेमा मालिनी, मधुर भंडारकर और कैलाश खेर जैसी बॉलीवुड हस्तियों ने भी किशोरी के निधन पर दुख जताया।

मुंबई में 10 अप्रैल 1932 को माधवदास भाटिया और मोगुबाई कुर्डिकर के घर जन्मीं किशोरी अमोनकर को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की पहली शिक्षा अपनी मां (प्रतिष्ठित गायिका) से ही मिली, जो पद्मभूषण और संगीत नाटक अकादमी जैसे सम्मान से नवाजी जा चुकी हैं।

किशोरी छह साल की उम्र में ही अपने पिता के साये से महरूम हो गईं। उनकी मां उन्हें अपने साथ संगीत कार्यक्रमों में ले जाती थीं। उन्होंने जयपुर घराने की संगीत की बारीकियां सीखीं और इसे अपने गायन शैली में भी शामिल किया।

बाद में उन्होंने भेंडी बाजार घराने (मुंबई) की अंजनीबाई मालपेकर और विभिन्न घरानों के संगीत शिक्षकों से प्रशिक्षण लिया।

छोटी बहन ललिता और भाई उल्हास सहित तीन भाई-बहन में सबसे बड़ी किशोरी ने जयपुर राजघराने की अनूठी शैली में गायन करते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और यहां तक कि कई प्रयोग भी किए। उन्होंने ठुमरी, भजन, खयाल आदि संगीत की विभिन्न विधाओं में गायन किया।

किशोरी ने 1950 के दशक के अंत में किन्हीं कारणों से अपनी आवाज खो दी, लेकिन दो साल बाद उनकी आवाज वापस आ गई और उन्होंने पूरे उत्साह के साथ गायन क्षेत्र में वापसी की।

उन्होंने स्कूल शिक्षक रवींद्र अमोनकर से शादी रचाई और दो बेटों की मां बनीं, लेकिन 1980 के दशक की शुरुआत में उनेक पति का निधन हो गया।

एक समय फिल्म संगीत की तरफ आकर्षित होकर उन्होंने वी. शांताराम की सुपरहिट फिल्म ‘गीत गाया पत्थरों ने’ (1964) में एकल गायन भी किया। शांताराम ने इस फिल्म से अपनी बेटी राजश्री और नवोदित अभिनेता जितेंद्र को लांच किया।

गायिका ने 25 साल के विराम के बाद राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वंसत देव द्वारा गोविंद निहलाणी की फिल्म ‘दृष्टि’ से वापसी की। यह सर्वश्रेष्ठ फिल्म के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजी गई। अमोनकर ने बतौर संगीत निर्देशक काम करेत हुए चार गाने गाए।

किशोरी अमोनकर 1985 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1987 में पद्मभूषण और 2002 में पद्म विभूषण से नवाजी गईं। साल 1991 में उन्हें डॉक्टर टीएमए पई फाउंडेशन द्वारा संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। साल 2009 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप ने सम्मानित किया गया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने प्रख्यात गायिका के प्रति शोक प्रकट किया है।

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