किडनी रैकेट: दो चिकित्सकों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Aug 13, 2016

पवई के एलएच हीरानंदानी अस्पताल में कथित किडनी प्रत्यारोपण के सिलसिले में स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को दो चिकित्सकों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। डिंडोशी सत्र अदालत के न्यायाधीश ख्वाजा फारूक अहमद ने वीणा स्वेलीकर (जनरल सर्जन) और सुविन शेट्टी (कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट) की याचिकाएं खारिज कर दीं। एक दिन पहले उनलोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और गिरफ्तारी से पहले जमानत देने की मांग करते हुए कहा था कि किडनी प्रत्यारोपण प्रक्रिया से पहले उन्होंने किडनी देने और लेने वालों की स्क्रीनिंग के दौरान नियमों का पालन किया था।

गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि 14 जुलाई को एक निजी अस्पताल में किडनी प्रतिरोपण होना है जहां डोनर और रिसीवर एक-दूसरे से परिचित नहीं हैं। बृजकिशोर जायसवाल का आॅपरेशन ऐन वक्त पर रोक दिया गया क्योंकि पुलिस ने पाया कि उनको किडनी देने वाली महिला उनकी वास्तविक पत्नी नहीं है जो दोनों की तरफ से सौंपे गए कागजातों के विपरीत था।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने जायसवाल की पत्नी होने का बहाना किया था ताकि धन लाभ के बदले वह किडनी दे सके। दोनों चिकित्सकों के पक्ष में जिरह करते हुए बचाव पक्ष के वकील ब्रायन डीलिमा ने कहा कि निगरानी समिति को दिए गए कुछ कागजात फर्जी साबित हुए हैं। साथ ही वीडियोग्राफी कराई गई और दोनों चिकित्सकों को सर्जिकल प्रक्रिया के लिए समिति की तरफ से मंजूरी मिली थी।
उन्होंने कहा कि यह चिकित्सक का काम नहीं है कि पता लगाए कि दस्तावेज फर्जी हैं या वास्तविक।

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