UGC अधिसूचना पर जेएनयू छात्रों की याचिका खारिज

Mar 16, 2017
UGC अधिसूचना पर जेएनयू छात्रों की याचिका खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा लागू की जा रही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की अधिसूचना के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। यूजीसी की अधिसूचना के तहत एक प्रोफेसर तीन एमफिल और आठ पीएचडी शोध छात्रों से ज्यादा का गाइड नहीं बन सकता है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. के. राव ने जेएनयू के छात्रों को किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। छात्रों का तर्क था कि 5 मई 2016 की यूजीसी की अधिसूचना से उनका भविष्य खतरे में है, क्योंकि इस अधिसूचना की वजह से वे एक शोध पर्यवेक्षक/ गाइड नहीं पा सकेंगे।

जेएनयू अधिकारियों ने अदालत से कहा कि अधिसूचना विश्वविद्यालय पर बाध्यकारी है और 43 केंद्रीय विश्वविद्यालय पहले से इसका पालन कर रहे हैं।

जेएनयू ने कहा कि वह यदि यूजीसी के नियमों का पालन बंद करते हैं तो वह न तो अनुदान प्राप्त कर पाएंगे और न ही डिग्री प्रदान कर सकेंगे।

इस अधिसूचना को विश्वविद्यालय द्वारा 26 दिसंबर 2016 की 142वीं अकादमिक परिषद की बैठक में अपनाया गया। इसे लेकर परिषद के कई सदस्यों ने विरोध जताया था।

छात्रों का तर्क था कि अधिसूचना का असर मौजूदा शोधकर्ताओं के परे होगा और इससे वर्तमान शैक्षिक सत्र में कुछ ही शोधार्थियों को प्रवेश दिया जा सकेगा।

दिल्ली उच्च न्यायालय गए वर्तमान और भावी छात्रों दोनों ने कहा कि वह इस पर सहमति देने के लिए तैयार हैं कि वे अधिसूचना को चुनौती नहीं दे रहे हैं बल्कि अपने मामले को अधिसूचना को लागू करने की जेएनयू प्रशासन की प्रक्रिया के खिलाफ सीमित कर रहे हैं।

छात्रों ने कहा कि जेएनयू ने अधिसूचना के क्रियान्वयन के लिए आयोजित बैठक में चर्चा के लिए उनके प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया।

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