जेएनयू छात्र नजीब पर नज़्म पढ़ते-पढ़ते फफ़क पड़े: इमरान प्रतापगढ़ी

Nov 09, 2016
जेएनयू छात्र नजीब पर नज़्म पढ़ते-पढ़ते फफ़क पड़े: इमरान प्रतापगढ़ी

पिछले 25 दिनों से दिल्ली की सड़को पर अपने बेटे की तलाश में दर-दर की ठोकर खा रही जेएनयू के छात्र नजीब अहमद मां के दर्द को इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने नज़्म को 3 नवंबर को कर्नाटका के एक मुशायरे में पढ़कर रोने लगे। वही मुशायरे में बैठे सभी लोगो को नजीब की मां की तकलीफ़ का अहसास कराया। मानों पूरी महफिल फफक कर रो रही हो। लगभग 13 मिनट की इस नज़्म में इमरान पढते रहे हैं और रोते रहे हैं।

इस नज़्म को आप यूट्यूब पर भी सुन सकते है। इमरान के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर अपलोड इस नज़्म को सुन सकते है। इस नज़्म को अब तक 89000 से ज़्यादा लोगों ने सुना है। इस नज़्म को हज़ारों लोगों ने शेयर भी किया है।

इस नज़्म का नशा कुछ ऐसा है कि नजीब की तलाश के लिए ऑंदोलन के ज़्यादातर पोस्टर पर ये नज़्म मौजूद है। इमरान प्रतापगढी ने एक इंक़लाब पैदा किया है।

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