जयललिता के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा

Jun 07, 2016

आय से अधिक संपत्‍ति अर्जित करने के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट से बरी की गई तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जयललिता के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक जून को ही सुनवाई पूरी कर ली गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि वह जल्‍द ही दोनों पक्षों द्वारा दी गई सभी दलीलों और मामले के सभी पहलुओं पर गौर करने के बाद अपना फैसला सुनाएगी.

पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि संपत्ति अर्जित करना गलत नहीं है. अगर आप सही तरीके से प्रॉपर्टी बनाते तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है. अगर किसी ने एक लाख रुपये का लोन लिया और अपने पास बचे पैसे को मिलाकर 2 लाख की कोई प्रॉपर्टी खरीदने गई तो उसमें गलत क्या है. गलत तब है जब लोन से लिया गया एक लाख रुपये गलत तरीके से लिए गए हो.

वहीं, कर्नाटक सरकार ने दलील दी थी कि इस मामले में जयललिता कि सम्पत्ति का हाईकोर्ट ने सही तरीके से आकलन नहीं किया है.

उल्लेखनीय है कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में स्पेशल कोर्ट ने जया और तीन अन्य को चार साल की सजा और 100 करोड़ का जुर्माना लगाया था. इसकी वजह से उन्हें सितंबर 2014 में मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी, लेकिन पिछले साल मई मे कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था और कहा था कि अगर आय दस फीसदी ज्यादा हो तो उसे अपराध नहीं माना जा सकता है. इसके बाद वे फिर से मुख्‍यमंत्री बनी थी.

कर्नाटक हाईकोर्ट के जयललिता को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. हाईकोर्ट के फैसले पर कर्नाटक सरकार और डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर कहा गया था कि हाईकोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति का गलत आकलन किया है.

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