तमिलनाडु में जयललिता की वापसी ,32 साल के इतिहास को बदला

May 20, 2016

तमिलनाडु में 32 साल का राजनीतिक इतिहास को बदलते हुए जनता ने अन्नाद्रमुक प्रमुख जे जयललिता को दोबारा गद्दी सौंपी.

अन्नाद्रमुक ने एक्जिट पोल के पूर्वानुमानों को गलत साबित करते हुए द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को पराजित किया.  चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि जनता ने वर्ष 1984 के बाद पहली बार किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता में पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है.

चार राज्यों और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात तमिलनाडु में सामने आयी जहां अन्नाद्रमुक ने शानदार जीत हासिल की . हालांकि मतदान बाद के सर्वेक्षणों में उसके सत्ता से बाहर जाने की भविष्यवाणी जोरशोर से की गयी थीं .

जयललिता की अगुवाई में अन्नाद्रमुक ने भी नया चुनावी इतिहास रच दिया. तमिलनाडु के जनादेश से  किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता नहीं सौंपने की परंपरा टूट गयी . 234 सदस्यीय विधानसभा में अन्नाद्रमुक अब तक 131 सीट जीत चुकी है और 3 पर आगे चल रही है.

वहीं, एम करूणानिधि की पार्टी द्रमुक ने 85 सीटें जीत ली है और 4 पर उनके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं. कांग्रेस ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की है. आईयूएमएल ने एक सीट पर जीत दर्ज है जबकि एक सीट पर आगे चल रही है.

विजयकांत की डीएमडीके की अगुवाई में तीसरे मोच्रे की पार्टियां विफल साबित हुई हैं और वह राज्य में मुकाबले को त्रिकोणीय नहीं बनाई पाई . यहां तक कि स्वयं अभिनेता से नेता बने विजयकांत अपनी सीट नहीं बचा पाये.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव में जीत पर अन्नाद्रमुक प्रमुख जे जयललिता को फोन करके बधाई दी.

चुनाव परिणाम से स्पष्ट है कि तमिलनाडु में इस बार भी मुख्य मुकाबला अन्नाद्रमुक के अगुवाई वाले गठबंधन और द्रमुक-कांग्रेस के गठबंधन के बीच ही रहा.

अन्नाद्रमुक कुछ छोटी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही थी जबकि द्रमुक और कांग्रेस ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और कुछ और छोटी पार्टियों को साथ लिया था.

इस चुनाव में अन्नाद्रमुक ने 227 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे. द्रमुक ने 180 और कांग्रेस 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी.

साल 2011 के विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 203 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था. इसमें अन्नाद्रमुक को 150, डीएमडीके को 29, माकपा को 10 और भाकपा को नौ सीटें मिली थीं. दूसरी तरफ द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को महज 31 सीटें ही मिली थीं. द्रमुक को 23, कांग्रेस को पांच और पीएमके को तीन सीटें मिली थीं.

तमिलनाडु की राजनीति में 1984 से यह चलन रहा है कि राज्य की सत्ता पर काबिज पार्टी को दूसरी बार कामयाबी नहीं मिली. लेकिन इस बार यह चलन बदल गया है. करुणानिधि हालांकि व्हीलचेयर में हैं, लेकिन द्रमुक को सत्ता मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभालने का संकेत दिया था.

चुनाव में अन्नाद्रमुक को करीब 41 प्रतिशत मत मिले जबकि द्रमुक को 31.5 प्रतिशत वोट मिलता दिख रहा है. कांग्रेस को 6.5 प्रतिशत मत और पीएमके को 5.3 प्रतिशत मत मिलता दिख रहा है. भाजपा को 2.9 प्रतिशत और डीएमडीके को 2.4 प्रतिशत मत मिलता दिख रहा है.

तमिलनाडु में जयललिता ने कई लोक लुभावन योजनाएं पेश की थी जिसमें मुफ्त में कई सामग्री देने की बात भी कही गई थी . इसके प्रत्युत्तर में द्रमुक ने भी सत्ता में आने के लिए कई लोक लुभावन वादे किये थे.

द्रमुक ने चेन्नई और इसके आसपास के इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ तथा इससे जुड़े बचाव एवं राहत कार्य ठीक ढंग नहीं चलाने का आरोप लगाते हुए जयललिता सरकार को घेरा था. लेकिन चुनाव परिणामों से ऐसा लगता है कि जयललिता जनता के गुस्से से बचने में सफल रहीं.

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