संसद में जावेद अख्तर बरसे ओवैसी पर, कहा ‘भारत माता की जय बोलना मेरा अधिकार है.’

Mar 16, 2016

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को गीतकार और राज्यसभा सदस्य जावेद अख्तर ने करारा जवाब दिया है.

राज्यसभा से विदाई ले रहे मनोनीत सदस्य जावेद अख्तर ने देश के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताते हुए जहां लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर जबर्दस्त हमला बोला, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा से अपने विधायकों, सांसदों एवं मंत्रियों पर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने वाले बयान देने से लगाम लगाने को कहा. उन्होंने ‘भारत माता की जय’ बोलने से इंकार करने वाले ओवैसी के बयान पर विरोध जताते हुए सदन में तीन बार ‘भारत माता की जय’ कहा.

राज्यसभा में अख्तर ने कहा कि हम अगर इन बेकार के मामलों में न उलझें तो सुपर पावर बन सकते हैं. अभी उसके कगार पर है. थोड़ा इन झंझटों को कम करें. उन्होंने कहा कि मैं ओवैसी के बयान की निंदा करता हूं. साथ ही सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाले किसी भी बयान का कड़ा विरोध करता हूं.  गौरतलब है कि महाराष्ट्र के लातूर ज़िले में एक सभा में ओवैसी ने ऐलान किया था कि भले उनकी गर्दन पर छुरी रख दी जाए, लेकिन मैं भारत माता की जय नहीं बोलूंगा.

अख्तर ने अपने विदाई संबोधन में ओवैसी का नाम लिए बिना कहा कि आंध्र प्रदेश में एक शख्स हैं जिन्हें गुमान हो गया है कि वह राष्ट्रीय नेता हैं जिनकी हैसियत एक शहर या एक मुहल्ले से ज्यादा नहीं है. वह कहते हैं कि वह किसी भी कीमत पर ‘भारत माता की जय’ नहीं बोलेंगे क्योंकि यह संविधान में नहीं लिखा है. शेरवानी और टोपी पहनने वाले लोकसभा के इस सदस्य पर प्रहार जारी रखते हुए अख्तर ने कहा कि वह बताएं कि संविधान में शेरवानी और टोपी पहनने की बात कहां लिखी है.

उन्होंने कहा, ‘बात यह नहीं है कि भारत माता की जय बोलना मेरा कर्तव्य है या नहीं, बात यह है कि भारत माता की जय बोलना मेरा अधिकार है.’ अख्तर ने कहा, ‘मैं कहता हूं- भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय.’ इस पर उच्च सदन सदस्यों की तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

इसके साथ ही उन्होंने सत्ता पक्ष को भी परोक्ष रूप से निशाने पर लिया और कहा कि देश में ध्रुवीकरण और धार्मिक कट्टरता फैलाने की कोशिशों को भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने सत्तारूढ़ बीजेपी से कहा कि वह अपने उन विधायकों, सांसदों, राज्य मंत्रियों और मंत्रियों तक को रोके, जो नफरत फैलाने वाले बयान देते हैं.

जावेद अख्तर ने कहा कि देश में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं जिन्हें कोई उखाड़ नहीं सकता, लेकिन लोकतंत्र तभी है, जब धर्मनिरपेक्षता है.

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