जननी एक्सप्रेस समय पर न पहुँचने से, गर्भवती को साइकिल पर लेकर जाना पड़ा अस्पताल

Aug 29, 2016
जननी एक्सप्रेस समय पर न पहुँचने से, गर्भवती को साइकिल पर लेकर जाना पड़ा अस्पताल

मध्य प्रदेश के छतरपुर में समय पर जननी एक्सप्रेस के न पहुंचने का एक और मामला सामने आया है। शहपुरा गांव के नन्हेभाई की बेटी प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। पिता ने जननी एक्सप्रेस को बुलाने के लिए फोन लगाया, लेकिन पता चला इलाके में एक माह से जननी एक्सप्रेस बंद है। इसके बाद उसने 108 पर फोन लगाकर मदद मांगी, लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली।
बेटी की पीड़ा असहनीय होती जा रही थी। जब प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली तो पिता ने आंगन में रखी साइकिल उठाई और बेटी को बैठाकर अस्पताल की ओर चल पड़ा। वह पैदल ही साइकिल पर बेटी को बैठाकर छह किमी दूर अस्पताल लेकर पहुंचा। बेटी को रास्तेभर ढांढस बंधाते हुए मां भी एक घंटे तक साथ में पैदल चलती रही। जैसे-तैसे बेटी को दोनों ने अस्पताल पहुंचाया जहां उसने एक बेटे को जन्म दिया।

डिलीवरी के बाद भी साइकिल से आना पड़ा
ये एकतरफ़ा बात हुई! आगे हैरानी की बात ये है कि डिलीवरी के चार घंटे बाद अस्पताल से महिला को छुट्टी दे दी गई और पिता फिर जाचे-बच्चे को साइकिल से ही घर लेकर आया। बीच में महिला की मां नवजात को संभालते हुए पैदल ही वापस आई।

एक महीने से बंद है जननी एक्सप्रेस
आंखें खोलने वाली यह घटना बकस्वाहा जनपद पंचायत के शहपुरा गांव की है। 26 वर्षीय पार्वती पति महेश आदिवासी पाली गांव से यहां अपने मायके शहपुरा गांव आई थी। रविवार की सुबह करीब 11 बजे उसे प्रसव पीड़ा हुई। पिता नन्हेभाई ने जननी एक्सप्रेस को फोन किया तो पता चला कि एक माह से यह सेवा बंद है। इसके बाद 108 पर फोन लगाया। पता चला कि वो भी कहीं गई है। बेटी की पीड़ा देख पिता ने उसे साइकिल पर बैठाया और छह किमी पैदल ही साइकिल से उसे दोपहर करीब 12.15 बजे अस्पताल पहुंचाया।
बेटे को दिया जन्म
पार्वती की मां भी एक घंटे तक पैदल चलकर उनके साथ आई। पार्वती ने बेटे को जन्म दिया। शाम 4 बजे अस्पताल से जच्चा-बच्चा की छुट्टी कर दी गई। घर जाने के लिए फिर कोई सरकारी साधन नहीं मिला तो नन्हेभाई ने उसे फिर साइकिल पर बैठाकर घर पहुंचाया। नवजात को पार्वती की मां गोद में लेकर किसी तरह घर पहुंची।

ये कोई पहला मामला नहीं
मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का मखौल उड़ने वाली ये कोई पहली खबर नहीं है, बल्कि इससे पूर्व भी ऐसे कई वाकये सामने आ चुके हैं। बीते दिनों 15 अगस्त को सोहागपुर में जननी एक्सप्रेस के समय पर न पहुँच पाने से एक महिला ने सड़क पर ही छाते की ओट में बच्चे को जन्म दिया था। गुजरे शुक्रवार को रीवा में जननी एक्सप्रेस और 108 सेवा के समय पर न पहुंचने पर महिला को ट्रेक्टर के कल्टीवेटर पर बिठाकर अस्पताल पहुँचाना पड़ा था। इसके अलावा जबलपुर में एक महिला को खुद रात के घुप्प अँधेरे में अपनी गर्भवती पड़ोसन को अस्पताल पहुँचाने का मामला भी सुर्खियाँ बटोर चुका है।

‘ठेकेदार ने भुगतान नहीं होने पर जननी एक्सप्रेस सेवा बंद कर दी है, जिससे यह समस्या आ रही है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।’
– डॉ. एलएल अहिरवार, बीएमओ

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