खुद जैशा ने बताया, हर देश ने अपना स्टॉल लगा रखा था, लेकिन हमारे देश का स्टॉल नहीं था।’

Aug 23, 2016
खुद जैशा ने बताया, हर देश ने अपना स्टॉल लगा रखा था, लेकिन हमारे देश का स्टॉल नहीं था।’

नई दिल्ली। रियो ओलंपिक के मैराथन इवेंट में भारत की और से हिस्सा लेने गईं ओपी जैशा के रेस के दौरान पानी न मिलने वाली बात को ऐथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने नकार दिया है। AFI ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि जैशा और उनके कोच ने खुद रेस के बीच में एनर्जीं ड्रिंक लेने से इनकार किया था। सोमवार को जैशा ने कहा था कि भारतीय ऑफिशलों ने उनके लिए रेस के दौरान न तो एनर्जी ड्रिंक्स का इंतजाम किया था और न ही पानी का। रेस पूरी होने के बाद वह तीन घंटे तक बेहोश रहीं और उन्हें कई बोतल ग्लूकोज चढ़ाया गया। जैशा ने बताया, ‘वहां बहुत गर्मी थी। सुबह 9 बजे से दौडऩा था। मैं चिलचिलाती धूप में दौड़ रही थी। वहां हमारे लिए न तो पानी था न ही खाने के लिए कुछ। 8 किमी दौडऩे के बाद हमें पानी मिला (ओलिंपिक आयोजकों की तरफ से), लेकिन वह हमारे लिए पर्याप्त नहीं था। ट्रैक पर हर देश ने हर दो किमी की दूरी पर अपना स्टॉल लगा रखा था, लेकिन हमारे देश का स्टॉल खाली था।’ जैशा के बयान को खारिज करते हुए एएफआई ने कहा कि उनके कोच ने ही किसी भी ड्रिंक को लेने से मना कर दिया था। एएफआई ने कहा है कि हर टीम को बूथ पर अपने ड्रिंक्स रखने की इजाजत दी गई थी, जिसे टीम और ऐथलीट के चॉइस के कलर के साथ मार्क किया जाता है।

AFI ने कहा है कि महिला मैराथन की पिछली रात को भारतीय टीम का मैनेजर 16 खाली बोतलों को लेकर उनके कमरे में गया था। इनमें से 8 जैशा के लिए और 8 कविता के लिए थीं। टीम मैनेजर ने उनसे कहा कि वे अपनी पसंद की ड्रिंक बता दें, ताकि उनकी उपस्थिति में उसे सील कर लिया जाए। इसके बाद आयोजकों को बोतलें दे दी जातीं और वे उसे उनके बूथ पर रख देते। एएफआई का कहना है कि जैशा और कविता दोनों ने ही इस ऑफर को ठुकरा दिया और इंडियन टीम मैनेजर को बताया कि उन्हें पीने के लिए कुछ नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें एनर्जी ड्रिंक की जरूरत पड़ेगी तो वे आयोजकों के बनाए वॉटर बूथ और रिफ्रेंशमेंट बूथ से ले लेंगे।
विमिन्ज मैराथन पूरी करके 89वें नंबर पर रहीं जैशा ने बताया, ‘मैंने अधिकारियों से पूछा कि वहां पानी क्यों नहीं था तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मुझे नहीं पता कि वे लोग वहां कर क्या रहे थे। भारतीय एथलेटिक्स दल में ढेर सारे लोग थे और कोई भी यह काम कर सकता था। मुझे पता ही नहीं था कि वे लोग थे कहां। मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी। मेरे कोच पर दुर्व्यवहार का आरोप लगा दिया गया। वह और क्या कर सकते थे?’ एएफआई ने ये भी कहा कि नियमों के अनुसार, किसी और से या किसी ऑफिशल से ड्रिंक लेने पर ऐथलीट को खेल से बाहर किया जा सकता है। या तो ऐथलीट को आयोजकों के बूथ से ही ड्रिंक लेनी होती है या फिर उनकी ड्रिंक आयोजकों को रेस से पहले ही दे दी जाती है ताकि वे उन्हें उपलब्ध करा सकें। एएफआई ने कहा कि इसलिए ओपी जैशा का यह आरोप कि उन्हें पानी और एनर्जी ड्रिंक्स नहीं दिए, एकदम निराधार है।

AFI के अनुसार, जैशा ने 2015 में पेइचिंग में हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी एक दूसरे इवेंट में एनर्जी ड्रिंक लेने से मना कर दिया था। उनके कोच ने बताया था कि उन्हें एनर्जी ड्रिंक लेने की आदत नहीं है।’एएफआई ने पुरुष मैराथन में हिस्सा लेने वाले ऐथलीटों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एनर्जी ड्रिंक की मांग की थी और उन्हें वह ड्रिंक उपलब्ध कराया गया था। अपने कोच निकोलाई नेसारेव के दुर्व्यवहार की खबरों पर जैशा ने कहा, ‘मेरे कोच बहुत नाराज थे और उनका गुस्सा डॉक्टरों पर निकल गया। कोच को लगा कि मैं मर गई हूं। मेरे कमरे में घुसने के लिए उन्होंने डॉक्टर को धक्का दे दिया, क्योंकि अगर मुझे कुछ हो जाता तो इसके लिए वही जिम्मेदार होते।’ जैशा ने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि स्टॉल पर पानी क्यों नहीं था, तो अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया।

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