सॉस बनाने में यूज़ होती है सड़ी हुई सब्जिया, कही आप तो नहीं खा रहे नकली सॉस

Apr 21, 2017
सॉस बनाने में यूज़ होती है सड़ी हुई सब्जिया, कही आप तो नहीं खा रहे नकली सॉस

अलर्ट हेल्थ डिपार्टमेंट ने हरियाणा के फरीदाबाद के NIT-3 स्थित एक घर में नकली सॉस बनाने की फैक्ट्री पर छापा मारा। जहाँ से 270 केन चिली सॉस, सोया सॉस और पुदीने की चटनी बरामद हुई है। यहां कई तरह के रंगों (केमिकल) का प्रयोग कर अवैध रूप से नकली सॉस तैयार किया जा रहा था। इसे मौके पर ही ख़त्म करा दिया गया।

असली और नकली सास कैसे बनती है:-

असली टोमैटो सॉस केवल टोमैटो पेस्ट से तैयार होती है। टोमैटो पेस्ट की कीमत 60 से 70 रुपए प्रति किलो है, जबकि नकली 20 से 30 रुपए प्रति किलोग्राम मिलती है। इसे बनाने के लिए गाजर, पेठा, मैदा समेत विभिन्न केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। स्टार्च डालकर इसे गाढ़ा करते है। इस तरह के सॉस की केन आपको जगह-जगह रेहड़ी-ठेलों पर बर्गर, पिज्जा, चाउमिन, टिक्की, समोसे बेचने वालों के पास आसानी से आपको मिल जाएगी।

नकली सास को लाल दिखाने के लिए केमिकल वाले रंग का यूज़ होता है। सॉस में सिंथेटिक केमिकल भी प्रयोग किया जाता है। जैसे सिंथेटिक सिरका (विनेगर)। सॉस में थोड़ी-बहुत सब्जी मिलाई जाती है, लेकिन सड़ी हुई। जैसे- सड़े हुए आलू और गाजर। ये स्वास्थ के लिए काफी हानिकारक है।

डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रामभगत ने गर्मियों के मौसम में रेहड़ियों पर बिकने वाली सामग्री को इस्तेमाल करने में सावधानी बरतने की सलाह जनता को दी है। उन्होंने कहा कि रेहड़ियों पर बिकने वाले चाट में इस्तेमाल तेल सॉस की गुणवत्ता बेहद खराब होती है। जिसे खाने से गंभीर रूप से बीमार भी हो सकते हैं। केमिकल वाली इस सॉस का शरीर पर बुरा असर पड़ता है। ऐसी सॉस में मिले केमिकल किडनी पर बुरा असर डालते ही हैं, ये लिवर को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

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