बूचड़खाने बंद करने का मुद्दा मुसलमानों का नहीं, बल्कि किसानों का है: महमूद मदनी

Mar 27, 2017
बूचड़खाने बंद करने का मुद्दा मुसलमानों का नहीं, बल्कि किसानों का है: महमूद मदनी

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी ने यहां के बगाही मैदान में रविवार को आयोजित ख्वाजा अजमेरी मशाइख कांफ्रेंस में कहा कि हिंदुस्तान में मुसलमान बाइ च्वॉइस हैं, बाइ चांस नहीं।

उन्होंने कहा, “हमारे पास इस्लामी मुल्क पाकिस्तान जाने का मौका था, लेकिन हमने ठुकरा दिया। हम देशभक्ति और अपने ईमान से समझौता नहीं कर सकते।”

मौलाना मदनी ने कहा कि बूचड़खाने बंद करने का मुद्दा मुसलमानों का नहीं है, यह मुद्दा किसानों का है। उन्होंने कहा कि देश से हर साल 30,000 करोड़ रुपये का मांस निर्यात होता है। मुसलमानों को चाहिए कि वे वैध समेत हर तरह के स्लाटर हाउस सालभर के लिए बंद कर दें और मांस खाना भी बंद कर दें। फिर देखिए कि देश की अर्थव्यवस्था का क्या हाल होता है, और तब सत्ता में बैठे लोग बूचड़खाने बंद करने की कभी जुर्रत नहीं करेंगे।

प्रदेश की योगी सरकार पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि मुसलमान पानी का बताशा नहीं जो पानी गिरते ही डूब जाए। अभी सरकार पर नुक्ताचीनी नहीं की जा सकती, क्योंकि उसे कुछ ही दिन सत्ता में आए हुए हैं। अगर योगी सरकार अच्छा काम करती है तो हम उसे जरूर सराहेंगे, लेकिन डर कर नहीं रहेंगे।

उन्होंने महिलाओं के हित में चलाए जा रहे अभियान की सराहना की और कहा कि ऐसे अभियान चलाए जाते रहने चाहिए।

आतंकवाद के मुद्दे पर मौलाना मदनी ने कहा कि जो लोग जेहाद की बात करते हैं वे जेहादी नहीं, बल्कि फसादी हैं। इस्लाम में एक बेगुनाह का खून इंसानियत का खून माना गया है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि वे बहकावे में न आएं और तालीम पर ध्यान दें। अभिभावक भी अपने बच्चों पर नजर रखें।

मदनी ने कहा, “यह मुल्क हमारा सज्दागाह है और हमारी कर्मभूमि है। इसे हमारे पुरखों ने अपने खून से सींचा है। मुसलमान चुनावों में किसी को हराने की नीयत से वोटिंग करना छोड़ें। हमेशा किसी को जिताने के लिए वोट दें, नेगेटिव वोटिंग का बुरा असर होता है।”

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