इशरत जहां मामला: चिदंबरम ने दायर हलफनामों को विवाद पैदा करने का आरोप लगाया

Jun 16, 2016

इशरत जहां मामले से संबंधित गायब फाइलों की जांच कर रहे आयोग ने रिपोर्ट सौंप दी है. इस बीच चिदंबरम ने सरकार पर दायर दो हलफनामों को लेकर ‘फर्जी विवाद’ पैदा करने का आरोप लगाया है.

कांग्रेस के नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने मोदी सरकार पर इशरत जहां मामले में लापता फाइलों की रिपोर्ट ‘छेड़छाड़ करके’ तैयार करने का भी आरोप लगाया.

रिपोर्ट में यह कहा गया है कि इशरत जहां मामले से जुड़ी गुम हुई फाइलों की जांच कर रहे पैनल ने एक गवाह को ‘प्रताड़ित’ किया. इसके बाद चिदंबरम ने एक बयान में कहा कि समाचार रिपोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार की ओर से दायर दो हलफनामों पर राजग सरकार द्वारा पैदा किए गए ‘फर्जी विवाद को व्यापक रूप से उजागर’ कर दिया है.

उन्होंने कहा, ‘कहानी से यह सीख मिलती है कि छेड़छाड़ करके तैयार की गई (जांच अधिकारी की) रिपोर्ट भी सच नहीं छुपा सकती. असल मुद्दा यह है कि क्या इशरत जहां और तीन अन्य लोग वास्तविक मुठभेड़ में मारे गए थे या उनकी मौत फर्जी मुठभेड़ में हुई थी. मामले की जुलाई 2013 से लंबित सुनवाई ही सच को सामने लेकर आएगी.’

गृह मंत्रालय मे अतिरिक्त सचिव बी के प्रसाद के नेतृत्व में एक सदस्यीय जांच समिति ने जमा की गई अपनी रिपोर्ट में कहा था कि गुम हुए पांच दस्तावेजों में से चार दस्तावेज अब भी नहीं मिले हैं.

सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय से गुम हुए पांच दस्तावेजों में से केवल एक कागज मिला है. लापता फाइलों की जांच कर रहे एक सदस्यीय जांच आयोग ने कहा है कि सितंबर, 2009 में कागजात ‘जाने या अनजाने में हटाये गये या खो गये’.

वहीं, एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक गायब कागजातों की जांच का नेतृत्‍व करने वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी बीके प्रसाद ने न सिर्फ एक गवाह को पूछे जाने वाले सवाल बताए, बल्कि यह भी बताया कि उसे जवाब क्‍या देना है. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने गवाह को बताया कि उसे यह कहना है कि उसने कोई कागजात नहीं देखे.

हालांकि अपने ऊपर लगे इन आरोपों को खारिज करते हुए एक न्यूज चैनल से बातचीत में इशरत जहां मामले में जांच कर रही समिति के प्रमुख बीके प्रसाद ने कहा कि मामले की जांच के दौरान जिस किसी को फोन करते थे तो लोग डर जाते थे कि उनसे क्या पूछताछ होगी. उन्होंने कहा कि वो डरे नहीं इसलिए मैंने अधिकारी को कहा कि आपने उस समय फाइल देखी है, अगर नहीं देखा तो बता देना और अगर देखा तो भी बता देना.

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक इशरत जहां मुठभेड़ से जुड़ी फाइलें गुम होने की जांच के लिए बनी समिति के प्रमुख ने गवाहों को पहले ही जवाब रटवा दिये थे. गवाहों को यह भी बता दिया गया कि उनसे क्या सवाल किये जाएंगे.

बीके प्रसाद ने गवाह से कहा कि मेरे को ये पूछना है कि आपने ये पेपर देखा. आपको कहना है कि मैंने ये पेपर नहीं देखा. रिपोर्ट की मानें तो बीके प्रसाद ने यह मामले के गवाह और गृह मंत्रालय के पूर्व निदेशक अशोक कुमार से यह कहा है.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बीते दस मार्च को लोकसभा में इशरत जहां से जुड़ी फाइलों के गुम होने की जांच के लिए समिति बनायी थी. बीके प्रसाद ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक 25 अप्रैल को दोपहर करीब 3.45 बजे रिपोर्टर ने प्रसाद को फोन किया.

रिपोर्टर ने उनसे किसी अन्य मामले पर जानकारी लेने के फोन किया किया था. प्रसाद का जवाब रिपोर्टर द्वारा रिकॉर्ड किया. इसी दौरान प्रसाद को दूसरा फोन आया और उन्होंने रिपोर्टर को होल्ड कर दूसरे फोन पर बात करनी शुरू कर दी. वे फोन पर इशरत जहां से जुड़ी फाइलों के गुम होने की जांच से संबंधित बात कर रहे थे. यह बातचीत भी रिपोर्टर के फोन में रिकॉर्ड हो गयी. जहां प्रसाद एक अधिकारी से बात कर रहे थे जिसे अगले दिन अपना बयान दर्ज करना था.

गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बीके प्रसाद ने केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि को इस मामले से संबंधित अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गृह मंत्रालय से गुम हो गये इशरत जहां कथित फर्जी मुठभेड़ मामले से संबंधित पांच दस्तावेजों में से केवल एक कागज मिला है.

जाहिर है कि दस्तावेज जानबूझकर या अनजाने में हटाये गये या खो गये. हालांकि, जांच आयोग ने रिपोर्ट में चिदंबरम या तत्कालीन यूपीए सरकार के किसी अन्य व्यक्ति का कोई उल्लेख नहीं किया है. उस समय कांग्रेस नेता चिदंबरम गृहमंत्री थे. तत्कालीन गृह सचिव जीके पिल्लै समेत 11 सेवारत और सेवानिवृत्त अफसरों के बयानों पर 52 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की गयी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दस्तावेज 18 से 28 सितंबर, 2009 के बीच लापता हो गये. इस मामले में गुजरात हाइकोर्ट में 29 सितंबर, 2009 को दूसरा हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया था कि इस बात के निर्णायक सबूत नहीं हैं कि इशरत लश्कर-ए-तैयबा की सदस्य थी.

एक असामान्य घटना में गृह मंत्रालय ने इशरत जहां मामले से जुड़ी लापता फाइलों से संबंधित मामले को देखने वाली एक सदस्यीय समिति का ब्योरा जाहिर करने से पहले एक आरटीआई याचिकाकर्ता से यह साबित करने को कहा है कि वह भारतीय है. मंत्रालय में दायर आरटीआइ याचिका में समिति की ओर से पेश रिपोर्ट की प्रति के अलावा आइएएस बीके प्रसाद को दिये गये सेवा विस्तार से जुड़ी फाइल नोटिंग का ब्योरा मांगा गया था.

गृह मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा, इस संबंध में यह आग्रह किया जाता है कि आप कृपया अपनी भारतीय नागरिकता का सबूत प्रदान करें. आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि यह सरकार की ओर से सूचना के निर्वाध प्रवाह और पारदर्शिता का मार्ग अवरुद्ध करने का तरीका है.

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