2006 के आत्महत्या के प्रयास मामले से इरोम शर्मिला किया बरी

Mar 30, 2016

मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला को दिल्ली की एक अदालत ने 2006 के आत्महत्या के प्रयास मामले से बुधवार को बरी कर दिया.

2006 में वह जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रही थीं.

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट हरविंदर सिंह ने 42 वर्षीय शर्मिला को बरी कर दिया जो अफ्सपा को हटाने की मांग को लेकर पिछले 16 वर्षों से मणिपुर में अनशन पर हैं. चार अक्टूबर 2006 को जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास करने के लिए उन पर चार मार्च 2013 को मुकदमा चलाया गया.

अदालत से मंगलवार को उन्होंने कहा था कि अगर विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) को हटाया जाता है तो वह अनशन खत्म करने को तैयार हैं और इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करने की इच्छा जताई.

शर्मिला को नाक में नली लगाकर तरल भोजन दिया जाता है. आत्महत्या के प्रयास के आरोप में गलती स्वीकार नहीं करने के बाद उन पर मुकदमा चलाया गया.

उनके खिलाफ मंगलवार की सुनवाई में अभियोजन ने कहा कि शर्मिला की आत्महत्या करने की मंशा थी और आत्महत्या करने के प्रयास का अपराध उनके खिलाफ बना है.

सुनवाई के दौरान कार्यकर्ता ने कहा कि उन्हें अपनी जिंदगी से प्यार है और वह अफ्सपा हटाने की मांग को लेकर अनशन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं क्योंकि इसका ‘ज्यादा असर’ होगा. उनका कहना है कि यह अपराध नहीं है.

अपने अनशन को उचित ठहराने के लिए मंगलवार को उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी कुछ मांगों को मनवाने के लिए अनशन किया था.’’

 

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