भारत अमेरिका संबंधों का बदलाव बेहद दिलचस्प: दूत

Mar 29, 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो साल से कम समय में तीसरी यात्रा से पहले अमेरिका में भारत के दूत ने कहा है कि दोनों देशों के संबंधों में ऐसा रोचक बदलाव आया है जिसके बारे में तीन दशक पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.

अमेरिका में भारतीय राजदूत अरूण के सिंह ने कहा कि हमारी भागीदारी हमेशा से इतनी पूर्वनिर्दिष्ट प्रतीत नहीं हुई. और तो और तीन दशक पहले दोनों देशों के बीच हितों की ऐसी व्यवस्था कल्पना से परे थी. बीते तीन दशकों में भारत अमेरिका संबंधों का बदलाव बेहद दिलचस्प है.

सिंह सप्ताहांत में ‘‘इवॉल्विंग इंडिया यूएस रिलेशन्स’’ पर 20वें वार्टन इंडिया इकोनॉमिक फोरम को संबोधित कर रहे थे.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत अमेरिका संबंधों को ‘‘21वीं सदी की परिभाषित भागीदारी’’ बताया है तो मोदी ने इस भागीदारी को ‘‘स्वाभाविक मेल’’ करार दिया है.

सिंह ने कहा ‘‘रणनीतिक सम्मिलन और इस सम्मिलन का वैश्विक महत्व हमारे कूटनीतिक उपनाम ‘वैश्विक रणनीतिक भागीदारी’ (ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) के साथ है.’’

उन्होंने कहा ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2014 में चुनाव जीतने के बाद दो बार अमेरिका आ चुके हैं और अगले सप्ताह वाशिंगटन डीसी में हो रहे परमाणु सुरक्षा सम्मेलन के लिए वह एक बार फिर यहां आ रहे हैं.’’

मोदी 31 मार्च से एक अप्रैल तक ओबामा की मेजबानी में हो रहे दो दिवसीय परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिका की राजधानी आने वाले हैं.

प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान सितंबर 2014 में हमारे देशों का अब तक का पहला ‘विजन स्टेटमेंट’ जारी किया गया था.

सिंह ने बताया कि हमारी रणनीतिक भागीदारी को और अधिक उन्नत बनाने के लिए राष्ट्रपति ओबामा की यात्रा के दौरान दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी दी गई थी. तब जारी किए गए एक संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण पत्र में गतिशील एशिया-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत की ‘‘एक्ट ईस्ट’’ नीति तथा अमेरिका की एशिया के ‘‘पुन:संतुलन’’ की अनुरूपता पर आधारित साझे लक्ष्य परिलक्षित हुए.

उन्होंने कहा कि रक्षा ऐसा क्षेत्र है जहां मजबूत भारत अमेरिका भागीदारी का प्रभाव स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने परिवर्तनकारी रक्षा प्रौद्योगिकी, सह उत्पादन एवं सह विकास में सहयोग को बढ़ाने के लिए रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल शुरू की है.

भारत ने पिछले कुछ साल में करीब 14 अरब डॉलर की रक्षा सामग्री अमेरिका से ली है.

सिंह के अनुसार, भारत और अमेरिका के सशस्त्र बल अन्य देशों के साथ किए जाने वाले द्विपक्षीय अभ्यासों की तुलना में कहीं ज्यादा अभ्यास करते हैं.

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