शौचमुक्त होंगी भारतीय रेलवे पटरियां, अब ट्रेन में होगा बायो-टॉयलेट

Jun 08, 2016

भारतीय रेलवे अब आपकी सेवा में हाइटेक होने को तैयार है. जी हां, रेलवे अब अपने वायदे को समय से पहले पूरा करने को बेताब दिख रही है. रेलवे ने अपनी पटरियों को ‘शौचमुक्त’ बनाने और सभी ट्रेनों में ‘बायो-टॉयलेट’ लगाने का लक्ष्य 2021 से घटाकर 2019 पर लाने का फैसला किया है और तीन से पांच साल के भीतर जल पुनर्चक्रण की क्षमता 1.2 करोड़ लीटर से बढ़ाकर 20 करोड़ लीटर करने का लक्ष्य तय किया है.

रेलवे बोर्ड के सदस्य हेमंत कुमार के अनुसार, ‘2019 तक भारतीय रेलवे के सभी 55,000 कोचों को 1,40,000 बायो टॉयलेट के साथ फिट किया जाएगा. 31 मार्च 2016 तक हमने रेलवे के 10,000 डिब्बों में लगभग 35,000 बायो-टॉयलेट को स्थापित कर लिया है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम काफी आश्वस्त हैं.’

गौरतलब है कि भारतीय रेलवे ने खुले तल वाली पुरानी टॉयलेट सीट की जगह बायो-टॉयलेट की शुरुआत 2014 में ही कर दी थी. पहले वाली पुरानी टॉयलेट सीट से मल-मूत्र को रेलवे पटरियों पर खुले में ही फेंक दिया जाता है.

इस तरह के Unhygienic Practices न केवल यात्रियों के लिए खराब और नुकसानदेह हैं, बल्कि पटरियों पर शौच के निस्तारण से पटरियां भी जल्दी बेकार हो जाती हैं और पटरियां संक्षारित होने लगती हैं.

भारतीय रेलवे में बायो-टॉयलेट की शुरुआत ‘स्वच्छ रेल, स्वच्छ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत की

गई थी. जिसमें पुराने टॉयलेट की जगह इसे लगाने की डेडलाइन 2020-21 थी.

RITES के अनुमान के मुताबिक, भारतीय रेलवे औसतन हर दिन लगभग 6000 टन ठोस अपशिष्ट पदार्थों को उत्पन्न करता है, जिनमें से 4,000 टन मानव अपशिष्ट को सीधे तौर पर रेलवे पटरियों पर फेंक दिया जाता है.

अब अगर भारतीय रेलवे सच में समय रहते ऐसा कर देती है, तो यह एक सकारात्मक कदम होगा. तब जाकर शायद हमें अपने भारतीय रेलवे पर गर्व होगा.

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