भारत मुहैया कराएगा, नामीबिया को हर संभव सहायता: राष्ट्रपति

Jun 17, 2016

भारत ने देश की सामाजिक-आर्थिक समृद्धि के लक्ष्य से नामीबिया की वर्तमान सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘हरमबी प्रॉसपैरिटी प्लान’ के लिए जरूरत होने पर ‘हर संभव सहायता’ देने की पेशकश की.

नामीबिया में संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत समेकित विकास और क्षमतावर्धन के माध्यम से ”विजन 2030” को लागू करने में भी नामीबिया के साथ साझेदारी करने में प्रसन्नता महसूस करेगा.

राष्ट्रपति मुखर्जी 1995 के बाद नामीबिया की यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय राष्ट्राध्यक्ष हैं.

उन्होंने कहा, ”हमारे दोनों देश अपने तरीकों से शासन के जटिल मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन यह वंचितों के सशक्तिकरण के माध्यम से होगा. और यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘हरमबी हाऊस’ में कोई तबका छूटा नहीं है और, वह हमारी सफलता होगी.”

नामीबिया और भारत के बीच मजबूत संबंधों को याद करते हुए मुखर्जी ने कहा कि उनकी यात्रा दोनों देशों के बीच बेहतरीन द्विपक्षीय संबंधों के दौरान हुई है.

उन्होंने कहा, ”भारत का हमेशा से मानना था कि उसकी अपनी स्वतंत्रता उस वक्त तक पूर्ण नहीं है, जबकि अफ्रीका में उसके भाई विदेशी आकाओं के हाथों प्रताड़ित हो रहे हैं. नामीबिया के स्वतंत्रता संग्राम में यहां के नेताओं और लोगों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर खड़े होने पर भारत को गर्व है.”

मुखर्जी ने कहा कि भारत-नामीबिया के संबंध परस्पर विश्वास और समझ की मजबूत नींव पर बने हैं.

उन्होंने कहा, ”हमारे दोनों देश औपनिवेशिक शासन के समान अनुभवों और स्वतंत्रता के लिए हमारे लोगों के संघर्ष से जुड़े हुए हैं.”

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि स्वापो (दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन) का पहला दूतावास 1986 में नयी दिल्ली में स्थापित हुआ और भारत के इस कदम के कारण उसे अन्य देशों से मान्यता मिलनी शुरू हो गयी और इससे नामीबिया की स्वतंत्रता अपरिहार्य हो गयी.

उन्होंने कहा, ”हम ‘हरमबी प्रॉसपैरिटी प्लान’ शुरू करने के राष्ट्रपति (हागा) गंगोब की दूरदृष्टि की प्रसंशा करते हैं. ‘हरमबी प्रॉसपैरिटी प्लान’ के सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नामीबिया को जिस भी सहायता की जरूरत होगी, वह मुहैया कराने के लिए भारत हमेशा तैयार है. समेकित विकास और क्षमतावर्धन के माध्यम से ‘विजन 2030’ को लागू करने में भी नामीबिया के साथ साझेदारी करने में भारत को खुशी होगी.”

मुखर्जी ने कहा कि संस्थापक राष्ट्रपति और नामीबिया के राष्ट्रपिता सैम नुजोमा और स्वापो पार्टी के सम्मानित नेता का वैश्विक नेता और भारतीयों के मित्र के रूप में भारत में बहुत सम्मान किया जाता है.

उन्होंने कहा, ”भारत ने नामीबिया के लोगों को आजादी दिलाने में उनके उत्कृष्ठ योगदान को सम्मानित करते हुए 1990 में उन्हें प्रतिष्ठित निशस्त्रीकरण और विकास के क्षेत्र में इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से नवाजा.”

पहले राष्ट्रपति मुखर्जी का स्वागत करते हुए नेशनल एसेम्बली के अध्यक्ष पीटर एच. काटजावीवी ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया.

उन्होंने कहा, ”देश की स्वतंत्रता से पहले ही संबंध बन गए थे. यह संबंध परस्पर विश्वास, समर्थन और एकजुटता पर आधारित है और भारत के लोगों ने आजादी और स्वतंत्रता के संघर्ष में नामीबिया के लोगों का साथ दिया.”

अध्यक्ष ने कहा कि जब हमें सबसे ज्यादा जरूरत थी, भारत हमारी मदद को आगे आया.उन्होंने नामीबिया की स्वतंत्रता के साथ ही तकनीकी और नीतिगत सहायता मुहैया कराने के लिए भारत को धन्यवाद दिया.

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