भारत आ सकती हैं आंग सान सू की शीघ्र

Jul 29, 2016

नोबल शांति पुरस्कार विजेता और म्यांमार की वर्तमान विदेश मंत्री आंग सान सू की ने भारत यात्रा की अपनी मंशा जताई है.

नोबल शांति पुरस्कार विजेता और म्यांमार की वर्तमान विदेश मंत्री आंग सान सू की ने विदेश राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह के साथ आसियान देशों की विदेश मंत्रियों की वियंटियाने (लाओस) में हुई बैठक के दौरान भारत यात्रा की अपनी मंशा जताई है. म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की ने आसियान देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की.

म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली के बाद से ही दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि दोनों देशों के नेताओं ने भारत द्वारा म्यांमार को विकास के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग प्रदान किए जाने पर चर्चा की. भारत के विदेश राज्य मंत्री ने म्यांमार के लोकतांत्रिक संगठनों को मजबूत करने में सहयोग का भरोसा दिलाया. विशेष रूप से वहां के सांसदों को संसद के कायरे को करने का प्रशिक्षण दिए जाने में सहयोग, संघवाद पर अपने अनुभव साझा करने, केंद्र-प्रदेश के संबंध, केंद्र-प्रदेश के बीच शक्तियों और संसाधनों का वितरण और राजनीतिक सुलह और सामंजस्य पर सलाह और सहयोग शामिल है.

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स्वरूप ने बताया कि इसके अलावा दोनों देशों के नेताओं ने भारत की विकास की योजनाएं जैसे कि कालादान मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट और एशियन ट्राइलेटरल हाईवे को विकसित करने में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की. इन दोनों योजनाओं के अलावा भारत द्वारा म्यांमार की सड़कों के रबड़ीकरण के लिए सहयोग पर विशेष रूप से चर्चा की गई. इसके लिए दोनों देश के नेताओं के बीच कांसेप्ट पेपर भी साझा किए गए.

 

म्यांमार की विदेश मंत्री ने उनके देश का इन विकास योजनाओं पर रुचि के साथ-साथ भारतीय सलाहकारों की इसमें कैसी भूमिका होगी उस पर भी विस्तृत चर्चा की. उन्होंने भारत की शौर्य उर्जा के क्षेत्र के व्यापक अनुभव के साथ कचरे का सड़क बनाने की तकनीक सीखने में भारत से सहयोग की मांग की है.

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भारत के लिए म्यांमार के न केवल विकास में एक बड़ा सहयोगी के रूप में उभरने की संभावना है बल्कि सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी यह देश एक बड़े सहयोगी के रूप मे उभर सकता है. इससे भी ज्यादा इसका क्षेत्रीय महत्व इसलिए भी है कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों का गेटवे होने के साथ चीन को साधने में भी भारत के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है.

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