भारत: सड़क दुर्घटनाओं में दिल्ली नंबर वन

Jul 01, 2016

देश में 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में राजधानी दिल्ली की सड़कें सर्वाधिक जानलेवा हैं. 2015 में दिल्ली में 8084 सड़क दुर्घटनाएं हुई जिनमें 1622 लोगों की मौत हुई.

यह आंकड़ा पूरे देश के शहरों की तुलना में सर्वाधिक है. दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण व्यावसायिक वाहनों की तेज रफ्तार होना है. राजधानी की सड़कों पर यातायात जाम भले ही एक बड़ी समस्या हो लेकिन एक कड़वा सत्य यह है कि अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में वाहनों की रफ्तार दिल्ली की सड़कों में अधिक है.

केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य तथा सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ डा.कमलजीत सोइ का कहना है कि तेज रफतार ही सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है. उनका कहना है कि जब तक सभी व्यवसायिक वाहनों पर स्पीड गर्वनर अनिवार्य नहीं होंगे तब तक दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना मुश्किल है.

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2015 में देश में 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में हुई सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े पेश करते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले लोग अन्य शहरों की तुलना में कहीं अधिक असुरक्षित है क्योंकि दिल्ली की सड़कों की हालत अत्यंत भयावह है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में दिल्ली की सड़कों पर 8085 सड़क दुर्घटनाएं हुई तथा 1582 सड़क दुर्घटनाएं ऐसी थी जो जानलेवा थी, इन दुर्घटनाओं में 1622 लोगो अपनी जान गंवाई है. जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से दूसरे नंबर पर चेन्नई शहर है जहां कुल 7328 सड़क दुर्घटनाएं हुई तथा 859 जानलेवा सड़क दुर्घटनाएं हुई जिनमें 886 लोग मारे गये.

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एनसीआर के शहरों में  गाजियाबाद कुल 826 सड़क दुर्घटनाएं हुई व 316 दुर्घटनाएं जानलेवा रही जिनमें 331 लोग मारे गये. इसी तरह फरीदाबाद में कुल 669 सड़क दुर्घटनाएं हुई, 199 जानलेवा दुर्घटनाएं हुई जिनमें 206 लोग मारे गये.

डा.कमलजीत सोई का कहना है कि व्यावसायिक वाहनों में ओवर लोडिंग भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है. कमलजीत सोइ के अनुसार देश भर में हुई सड़क दुर्घटनाओं के आकलन से पता चलता है कि दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक के समय में दुर्घटनाएं ज्यादा हुई हैं. शाम को होने वाली दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण आफिस या अपने संस्थान से घर जाने की जल्दी होना है. उन्होंने बताया कि एक चौथाई दुर्घटनाओं में दुपहिया वाहन चालक मौत का शिकार होते हैं.

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सोई के अनुसार सव्रे बताता है कि सड़कों पर यातायात की अधिकता के दौरान रफतार कम होने के कारण दुर्घटनाएं कम होती है, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण लेन ड्राइविंग का न होना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, रेड लाइट जंप करना तथा पैदल यात्रियों की उपेक्षा है. उन्होंने कहा कि यदि स्पीड गर्वनर अनिवार्य कर सख्ती से लागू किया जाये तो दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है.
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