भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों का समर्थन और असंतोष भड़काने का आरोप लगाया

Jul 15, 2016

भारत ने आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के मद्देनजर कश्मीर की स्थिति पर पाकिस्तान की कड़ी टिप्पणियों को लेकर उसे करारा जवाब दिया और उस पर जम्मू कश्मीर में न केवल आतंकवादियों की घुसपैठ कराने बल्कि आतंकवादी संगठनों का समर्थन करके घाटी में असंतोष भड़काने का भी आरोप लगाया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने जोर देकर कहा कि वानी का मुद्दा भारत का आंतरिक मुद्दा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का इस मामले में कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने पाकिस्तान से कहा कि वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करे.

यह पूछे जाने पर कि क्या कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की रणनीति में बदलाव आया है जहां ‘देसी आतंकवादियों’ की संख्या में बढ़ोतरी हुई है उन्होंने कहा, ”यह पाकिस्तान की ही जारी नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह सीमापार से आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के साथ ही आतंकवादी संगठनों को विभिन्न तरह का समर्थन मुहैया कराकर घाटी में असंतोष को भड़काता है.”

स्वरूप ने कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के पाकिस्तान के प्रयास को ”संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए आत्म केंद्रित कदम” करार दिया. उन्होंने कहा कि विश्व में इस बारे में स्पष्ट दृष्टिकोण है कि क्षेत्र का कौन सा देश अन्य के क्षेत्र पर नजर गडाये रखता है, आतंकवाद का इस्तेमाल देश की नीति के तौर पर करता है, संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करता है तथा मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है.

उन्होंने कहा, ”आतंकवाद अंतत: आतंकवाद ही है और पाकिस्तान चाहे इसके लिए जो भी दलील दे, यह बदलेगा नहीं.” उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा कश्मीर की स्थिति का मामला उठाने के लिए इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त को तलब किये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय उच्चायुक्त ने पाकिस्तान को अवगत करा दिया है कि यह भारत का आंतरिक मामला है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने इस मामले में उन्हें जारी ‘डिमार्श’ को भी खारिज कर दिया है.

स्वरूप ने इन खबरों को खारिज किया कि इस मुद्दे पर यहां स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया जाएगा. उन्होंने कहा कि चूंकि यह एक आंतरिक मामला है, भारत को पाकिस्तान को शामिल करने का कोई कारण नहीं दिखता जिसका इस मामले में कोई अधिकार नहीं है.

उन्होंने यह भी कहा कि हिजबुल कमांडर के मारे जाने के बाद पाकिस्तान की ओर से हाल में की गई टिप्पणियां आतंकवाद से उसका लगाव जारी रहना और उसका इस्तेमाल देश की नीति के तौर पर किये जाने को प्रतिबिंबित करता हैं.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने जहां वानी के मारे जाने पर ”हैरानी” जतायी है, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे ”न्यायेतर” बताया है.

जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद के इन बयानों पर कि कश्मीर में जारी प्रदर्शन तेज होंगे और यह चेतावनी कि क्षेत्र में होने वाली मौतें व्यर्थ नहीं जाएंगी, स्वरूप ने कहा कि यह पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे तत्वों पर अंकुश लगाये क्योंकि स्थायी शांति के लिए ऐसे तत्वों को नियंत्रित करना होगा.

यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान के अलावा क्या अन्य किसी मुस्लिम देश ने कश्मीर की स्थिति का मामला भारत के समक्ष उठाया है, उन्होंने कहा कि इस बारे में इस्लामी देशों के संगठन (ओआईसी) की ओर से एक बयान आया है. उन्होंने इस पर कहा, ”कोई अधिकार नहीं है और हमें किसी से मुफ्त की सलाह नहीं चाहिए.”

कल ओआईसी ने एक बयान जारी करके कहा था कि वह ”आठ जुलाई 2016 को कश्मीरी नेता वानी को भारतीय सुरक्षा दलों द्वारा मारे जाने के खिलाफ होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में कम से कम 30 नागरिकों के मारे जाने और सैकड़ों अन्य के घायल होने की कड़े शब्दों में निंदा करता है.”

ओआईसी ने कहा कि वह घटना की गहन एवं उचित जांच का आह्वान करता है.

 

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