दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने के मामलें में पुलिस ने सीएम योगी से मांगी उनके ही खिलाफ एक्शन की इजाजत

Mar 23, 2017
दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने के मामलें में पुलिस ने सीएम योगी से मांगी उनके ही खिलाफ एक्शन की इजाजत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद सँभालने के बाद योगी आदित्यनाथ के पास अपने 10 साल पुराने हेट स्पीच मामलें की फाइल सीएम योगी के पास खुद पहुंची हैं। जिसमे इस केस से जुड़े आरोपियो पर मुकदमा चलाने की आधिकारिक अनुमति मांगी गयी है। हैरानी की बात ये है कि इस केस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी खुद आरोपी हैं। आदित्यनाथ के अलावा गोरखपुर एमएलए राधामोहन दास अग्रवाल और बीजेपी राज्य सभा एमपी शिव प्रताप शुक्ला भी इस केस में आरोपी हैं।

पुलिस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईपीसी की धारा 153-A (धर्म के आधार पर दो समुदायों को भड़काने) के तहत चार्जशीट दायर करने की आधिकारिक इजाजत की माँग की गई है। यह मामला 26 जनवरी 2007 को गोरखपुर में हुई साम्प्रदायिक हिंसा से जुड़ा है।

दरअसल, 26 जनवरी 2007 को गोरखपुर में एक महिला से छेड़छाड़ कर रहे थे। पुलिस ने आरोपी लड़कों को गिरफ्तार करना चाही लेकिन मोहर्रम के जा रहे जुलूस का फायदा उठाकर भीड़ में शामिल हो गए। इसी बीच मोहर्रम के जुलूस में कही से फायरिंग हो गई। जिसमे एक लड़के की मौत हो गयी थी। कई लोग घायल हो गये थे। इसके बाद इलाके में साम्प्रदायिक तनाव फ़ैल गया था।

इस मामले में पूर्व पत्रकार परवेज ने एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की थी। लेकिन पुलिस ने मना कर दिया जिसके बाद हाई कोर्ट के कहने पर 26 सिम्बर 2008 को एफआईआर दर्ज हुई। एफआईआर के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने दो समुदायों के बीच हिंसा भड़काने के लिए भड़काऊ भाषण दिए थे। जिसमें उन्होंने हिंदू लड़के की मौत का बदला लेने की धमकी की बात कही थी। पत्रकार का दावा है की उसके पास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित रूप से दिए गए भड़काऊ भाषण की वीडियो फुटेज है जो उन्होंने कर्फ्यू लगे होने के दौरान दिए थे। इस दौरान योगी के साथ उस मौके पर मौजूद गोरखपुर एमएलए राधामोहन दास अग्रवाल, बीजेपी राज्य सभा एमपी शिव प्रताप शुक्ला, मेयर अन्जु चौधरी और पूर्व बीजेपी एमएलसी वाई डी सिंह भी मौजूद थे।

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