दूध से भी जयादा बढ़ी भारत में गौमूत्र की मांग, मांग पूरी करना हो रहा मुश्किल

Oct 10, 2016
दूध से भी जयादा बढ़ी भारत में गौमूत्र की मांग, मांग पूरी करना हो रहा मुश्किल

यूपी के बुलंदशहर जिले में एक गोशाला चलाने वाली सुशीला कुमारी के मालिक गोमूत्र की एक भी बूंद बर्बाद नहीं होने देना चाहते। न्होंने अपनी मेड सुशीला को यह काम सौंप रखा है। कि वह एक कटोरा लेकर दिनभर गोमूत्र एकत्र करे। सुशीला और दो अन्य नौकर मिलकर दिन भर में करीब 15 से 20 लीटर गोमूत्र एकत्र करलते हैं। वजह यह है कि भारत के हिंदू समाज में पवित्र मानी जाने वाली देशी गायों के मूत्र की मांग इन दिनों काफी बढ़ गई है। इसी लिये बुलंदशहर की गोशाला में काम करने वाली सुशीला कुमारी इस बात का ख्याल रखती हैं कि गोमूत्र बेकार न जाए और वह उसे एकत्र कर लें।  फिलहाल यह एक हॉट कमोडिटी है और इसकी सेल दूध से भी ज्यादा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। नागपुर स्थित गो-विज्ञान अनुसंधान केंद्र के चीफ कॉर्डिनेटर सुनील मानसिंहका का कहते हैं, ‘गोमूत्र के जरिए घर पर ही करीब 30 दवाईया तैयार की जा सकती हैं।’ सुनील कहते हैं कि हम चाहते हैं कि यह ‘अमृत’ को देश के हर नागरिक तक पहुंचे ।

दूसरी तरफ। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने फिनाइल की तर्ज पर ही फ्लोर क्लीनर गोनाइल को लॉन्च किया है। कंपनी के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने ब्लूमबर्ग से बातचीत में कहा, ‘हम हर दिन करीब 20 टन गोनाइल तैयार करते हैं। इसके बावजूद हम मांग को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।’ वह कहते हैं कि गोमूत्र में कई ऐसे तत्व हैं, जो तमाम बीमारियों के इलाज का काम करते हैं। पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात की जूनागढ़ ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तो यहां तक कहा है कि गिर नस्ल की गायों के गोमूत्र में सोना पाया जाता है।
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