योग ना करने पर IIT रुड़की के छात्रों को सजा, देना होगा सात सौ रुपये बतौर जुर्माना

Jun 27, 2016

हरिद्वार। साल भर पहले औपचारिक तौर पर शुरू किया गया योग अब देश के भावी इंजीनियरों के लिए भारी पड़ रहा है। छात्रों को अब योग ना करने की इच्छा जताना भी महंगा पड़ रहा है। ताजा मामला आईआईटी रुड़की (उत्तराखंड) का है जहां एम.टेक की पढ़ाई कर रहे आरकेबी हॉस्टल के उन छात्रों जुर्माना लगाया गया है जो योग शिविर में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इस मामले में आईडीडी कॉलेज प्रशासन की ओर से नोटिस भी जारी किया गया है।

कॉलेज की ओर जारी नोटिस में लिखा गया है कि एमटेक के दौरान आरकेबी के सभी छात्रों को सूचित किया जाता है कि जो योग शिविर में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं उनको सात सौ रुपये बतौर जुर्माना देना होगा और इसके लिए देय राशि की किसी भी तरह की रसीद भी नहीं मिलेगी। यह फरमान हॉस्टल के असिस्टेंट वॉर्डन मनीष पांडे द्वारा जारी किया गया है। इसमें आगे लिखा गया है अगर वे योग शिविर को ज्वाइन नहीं करते हैं तो वे बाकि दिन के लिए आराम कर सकते हैं। हालांकि छात्रों पर इस तरह का दवाब डालना कानून सम्मत भी नहीं है

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इसी प्रकार बी.टेक और आईडीडी (Integrated Dual Degree) के छात्रों के लिए नोटिस में लिखा गया है कि अगर वह पंद्रह दिन के लिए योग शिविर में हिस्सा नहीं लेते हैं तो इसके लिए सात सौ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसे गंभीरता से लें। देश के पहले आईआईटी संस्थान में छात्रों को संघ की विचारधारा के साथ ट्रीट किया जाना देश के लिए भी घातक हो सकता है। दरअसल इस संस्थान में आरएसएस की शाखा भी लगती है। इससे पहले एससी, एसटी और ओबीसी के छात्रों को इसी तरह का फरमान न मानने पर एक सेमेस्टर के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। इस मामले में काफी बवाल भी हुआ।

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दरअसल शिक्षण संस्थानों में इस तरह के संघी फरमान का यह पहला मामला नहीं है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय पर इससे पहले भी विश्वविद्यालयों का भगवाकरण करने के आरोप लगते रहे हैं। हैदराबाद यूनिवर्सिटी से लेकर जेएनयू और इविवि तक सरकार अपने फरमान लागू करने की कोशिश कर चुका है। सरकार जातिवादी तौर पर पूरी तरह से आरक्षण खत्म करने की कोशिश भी कर रही है। अंबेडकर के नाम के सहारे चुनावी मैदान मारने की कोशिश करने वाली सरकार उनके बनाए संविधान से बिल्कुल विपरीत व्यवहार कर रही है।

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