अगर ऑनर किलिंग का डर है तो शादी के फॉर्म में करें घोषणा

Aug 12, 2016

झूठी शान के लिए हत्या से चिंतित सीआईसी ने केंद्र और राज्य सरकारों को सुझाव दिया है कि अगर किसी दंपति को अपने जीवन और स्वतंत्रता को लेकर खतरा महसूस हो रहा है तो अदालत में शादी करने की इच्छा रखने वाले दंपति के लिए घोषणा पत्र शामिल करें.

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने यह भी सुझाव दिया कि विशेष विवाह कानून के तहत रजिस्ट्रार के समक्ष शादी के दौरान दंपति पुलिस सुरक्षा की भी मांग कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह का आग्रह थाना अधिकारियों को भेजा जाना चाहिए जो मामले में जांच कर सकते हैं और प्रथमदृष्ट्या एसएचओ अगर खतरे को सही पाता है तो दंपति को सुरक्षा देने के लिए पर्याप्त कदम उठा सकता है.

बहरहाल, आयोग ने एसडीएम या विवाह अधिकारियों को निर्देश दिया कि विशेष विवाह कानून के तहत शादी का 30 दिन का नोटिस सुनिश्चित किया जाए, जो आरटीआई कानून की धारा 4 (1) (डी) के तहत आवश्यक है ताकि संबंधित व्यक्ति (अभिभावकों सहित) इस बारे में जान सकें और अगर आपत्ति हो तो जाहिर कर सकें.

 

विशेष विवाह कानून के तहत शादी तभी हो सकती है जब इस सिलसिले में नोटिस की एक प्रति एसडीएम द्वारा कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाए.

सूचना आयुक्त ने कहा, ‘नोटिस जारी होने के 30 दिन के अंदर कोई भी व्यक्ति होने वाली शादी को लेकर आपत्ति जता सकता है. ऐसे मामले में एसडीएम शादी नहीं होने दे सकते जब तक कि आपत्ति प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर उस पर निर्णय नहीं कर लिया जाता.’

सूचना आयुक्त ने कहा कि अगर एसडीएम शादी होने देने से इंकार करते हैं तो कोई भी पक्ष जिला अदालत में 30 दिन के अंदर अपील कर सकता है. अगर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराता तो एसडीएम नोटिस जारी होने के 30 दिन बाद शादी करा देते हैं.

आचार्युलू ने कहा, ‘सामान्यत: कानून के तहत शादी होने के लिए नोटिस आवश्यक पहलू है. कानून के तहत पंजीकरण दो उद्देश्य पूरे करता है – समाज को प्रस्तावित शादी की सामान्य जानकारी देना और फिर शादी के सबूत के तौर पर.’

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>