अगर बाबा भगवान का स्वरूप हैं तो फिर वे अपनी मदद क्यों नहीं कर सकें?

Aug 25, 2017
अगर बाबा भगवान का स्वरूप हैं तो फिर वे अपनी मदद क्यों नहीं कर सकें?

25 अगस्त को हरियाणा की पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत के जज जयदीप सिंह के आदेश के बाद डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सेंट्रल जेल पहुंच गए हैं। आसाराम बापू के बाद राम रहीम ऐसे दूसरे धर्मगुरु हैं जो स्वयं को भगवान का स्वरूप मानते हैं। यही वजह है कि इनके लाखों भक्त हैं।

बापू आसाराम एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण और गुरमीत राम रहीम अपनी दो साध्वियों के साथ बलात्कार के आरोप में जेल पहुंचे हैं। आसाराम पिछले चार वर्षों से जोधपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं, जबकि राम रहीम को कितने वर्ष जेल में रहना पड़ेगा इसका फैसला 28 अगस्त को होगा।

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अदालत ने आज राम रहीम को दोषी करार दिया है। जबकि सजा का फैसला 28 अगस्त को दिया जाएगा। हालांकि राम रहीम को जेल जाने से रोकने के लिए लाखों श्रद्धालु सिरसा और पंचकूला में एकत्रित थे, लेकिन इस देश में कानून और न्याय व्यवस्था का राज है।

इसलिए राम रहीम चुप चाप अम्बाला की सेंट्रल जेल पहुंच गए। अब यह देखना है कि राम रहीम के लाखों भक्त क्या करते हैं। लेकिन भक्तों को भी इस बात पर विचार करना चाहिए कि यदि बाबा भगवान का स्वरूप हैं तो फिर वे अपनी मदद क्यों नहीं कर सकें? कलयुग में यह बात बेमानी है कि सतयुग में भगवान कृष्ण भी जेल गए थे। अब कलयुग का दौर है इसलिए श्रद्धालुओं को उसी नजरिए से अपनी धार्मिक भावनाओं को व्यक्त करना चाहिए। शायद बाबा राम रहीम को अपने जेल जाने का आभास पहले ही हो गया था।

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इसलिए उन्होंने स्वयं को मैसंर्ज आॅफ गौड घोषित करतें हुए एमएसजी नाम की तीन चार फिल्म बना दी। सवाल उठता है कि राम रहीम ने जो चमत्कार फिल्मों में किया वैसा ही चमत्कार जेल जाने से बचने के लिए क्यों नहीं किया? राम रहीम को यह सोचना चाहिए कि जब उनके समर्थकों ने सड़कों पर डेरा जमाया तो अदालत के आदेश से सेना को बुला लिया गया।

यानि कानून का राज कायम रखने के लिए हर हालात में राम रहीम को जेल भेजा गया। यदि भक्तजन राम रहीम को वाकई भगवान मानते हैं तो उन्हें कानून अपने हाथ में लेने के बजाए भगवान के चमत्कार पर भरोसा रखना चाहिए।

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एस.पी.मित्तल

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