भूखी और बीमार गायों को संभाल नहीं पा रहे, लेकिन फिर भी कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ाएंगे गायों संख्या

May 19, 2017
भूखी और बीमार गायों को संभाल नहीं पा रहे, लेकिन फिर भी कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ाएंगे गायों संख्या

बिहार सरकार ने सड़कों पर लावारिस घूम रहे साढ़ों और नर बछड़ों की संख्या कम करने और राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृत्रिम गर्भाधान के जरिए गायों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके तहत राज्य के कुछ जिलों में विशेष कृत्रिम गर्भाधारण विधि से अधिक गायों की जन्म सुनिश्चित की जा सकेगी।

सरकार का मानना है कि अधिक गायों के जन्म से न केवल राज्य में दूध के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लावारिस छोड़े जा रहे बछड़ों की समस्या को भी दूर करने में मदद मिलेगी।

पशु एवं मत्स्य पालन विभाग के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य के छह जिलों में शुरू होने वाली इस योजना में सरकार गायों को विशेष गर्भाधान विधि अपनाने के लिए किसानों को 45 प्रतिशत अनुदान भी देगी। इस ‘सर्टेड सीमन स्ट्र’ के जरिए केवल गायों का जन्म सुनिश्चित होता है।

ये भी पढ़ें :-  शर्मनाक: मथुरा के मंदिर में साध्वी का हुआ रेप, CCTV में कैद हुई वारदात

विभाग के अवर सचिव उमाशंकर प्रसाद ने बताया, “परियोजना के लिए प्राथमिक रूप से उन गायों को चुना जाएगा, जो पहली बार गर्भधारण करने वाली हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधि 90 प्रतिशत तक सफल मानी जाती है।”

उन्होंने कहा, “आमतौर पर देखा जा रहा है कि दूध के कारोबार से जुड़े लोगों का नर बछड़े के प्रति खास दिलचस्पी नहीं है। इस कारण नर बछड़े के जन्म के बाद उसे सड़कों या गांवों की गलियों में छोड़ देते हैं और बाद में यह लावारिस पशु बनकर फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।”

प्रसाद कहते हैं, “इस कृत्रिम गर्भाधान के जरिए न केवल लावारिस नर बछड़ों और साढ़ों की समस्या से निजात मिलेगी, बल्कि अधिकांश गायों के जन्म लेने के बाद दूध उत्पादन में भी वृद्धि होगी।”

ये भी पढ़ें :-  पूरे गांव में गम का माहौल: एक साथ उठी 19 अर्थ‍ियां, जहां मिली मौत, वहीं हुआ अंतिम संस्कार

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान विधि 90 प्रतिशत सफल माना जाता है। मादा बछड़ों के जन्म के बाद जहां पशुपालकों की आय बढ़ेगी, वहीं बेरोजगार युवकों का भी इस व्यवसाय के प्रति आकर्षण बढ़ेगा।

बिहार पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि इस विधि से गर्भाधान कराने की योजना लागू करने के पूर्व कई पशुपालकों से सलाह मांगी गई थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गायों और बैलों की संख्या बढ़ाने को लेकर एक अन्य योजना पर भी सरकार काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि यह विधि दो से तीन अन्य राज्यों में पूर्व से ही लागू किया गया है, जो सफल भी रहा है।

ये भी पढ़ें :-  जापान के शिंजो आबे और उनकी पत्नी को पीएम मोदी ने ऐतिहासिक ‘सीदी सैय्यद मस्जिद’ का कराया दीदार

प्रसाद ने बताया कि बिहार में प्रत्येक वर्ष 26 लाख से 27 लाख गायें कृत्रिम गर्भाधारण की विधि से गुजरती हैं, जिनमें बछड़े और बछिया के जन्म का अनुपात आधे से आधा है।

शुरुआत में यह योजना नालंदा, भोजपुर, सारण, गोपालगंज, बक्सर और गया जिलों में वित्तीय वर्ष 2017-18 लागू की जा रही है। इन जिलों में सफलता के बाद इसे अन्य जिलों में लागू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि विभाग ने दो साल में 40,000 गायों के कृत्रिम गर्भाधारण का लक्ष्य रखा है।

लाइक करें:-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>