इंसानियत शर्मसार, बाप ने मांगी बेटी की लाश ले जाने के लिए भीख

Sep 09, 2016
इंसानियत शर्मसार, बाप ने मांगी बेटी की लाश ले जाने के लिए भीख

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में इंसानियत शर्मसार हुई है। देश के एक कोने से आई तस्वीर के बाद भी सभ्य समाज में ऐसी तस्वीर फिर देखने को मिली है। लखीमपुर खीरी में जहां गरीब पिता ने पहले अपने बच्ची को खो दिया और फिर उसकी लाश ले जाने के लिए उसे चादर फैलाकर फुटपाथ पर भीख मंगनी पड़ी। जब ये वाकया सामने आया तो जैसे मानो इंसानियत भी रो पड़ी। लाचार बाप की बेबसी और हमारे सिस्टम की नाकामी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। जो हमारे संवेदनहीन समाज और सिस्टम की सच्चाई बताने के लिए काफी हैं।

मामला लखीमपुर खीरी जिले का है। लखीमपुर से 45 किलोमीटर दूर मितौली से रमेश अपनी बेटी अंजली को तेज बुखार के चलते 108 एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लेकर आया था। लेकिन जिला अस्पताल आते आते अंजली की सांसे थम चुकी थी। रमेश के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो बिटिया की लाश को वापस ले जा सके। मजबूर बाप सभी के आगे रोता गिड़गिड़ाता रहा लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। आखिरकार उसे सड़क पर बेटी का शव रख कर लोगों से भीख मांगनी पड़ी तब जाकर वो बिटिया की पार्थिव देह को घर ले जाने लायक रकम जुटा पाया। हालांकि रमेश सभी अधिकारियों के दर पर गुहार भी लगा चुका था ताकि वह अपनी बेटी की लाश घर ले जा सके। फिलहाल तस्वीरें समाज को आइना दिखाने के लिए काफी हैं कि हमारा समाज किस तरफ जा रहा है।
लाचार बाप की बेबसी और हमारे सिस्टम की नाकामी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। फिलहाल मामले के जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। सवाल सूबे के मुखिया से है, मुख्यमंत्री जी स्मार्टफोन देने का पंजीकरण बाद में करवा लेना, पहले जिला अस्पतालों से गरीब की लाशों को घर तक भिजवाने की अनिवार्यता का पंजीकरण करवा दो ताकि ऐसी तस्वीरें फिर सामने न आ सकें और हम अपने को सभ्य कह सकें।
पैसे नहीं थे इसलिए मांगा भीख
रमेश ने बताया कि जैसे ही वह अपनी बेटी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा जहां उसने दम तोड़ दिया। फिर डाक्टरों ने उसे अस्पताल से बाहर ले जाने के लिए कहा। बेटी को घर ले जाने के लिए उसके पास पैसा नहीं था तो उसने फुटपाथ पर चादर बिछाकर भीख मांगे। उसके बाद वह अपने बेटी की लाश को लेकर घर पहुंचे। लेकिन अस्पताल की तरफ से लाश ले जाने के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हुई।
ठेला चलाकर पालता है परिवार का पेट
ग्रामीण गंगाराम ने बताया कि पीड़ित रमेश की हालात काफी दयनीय है। वह ठेला चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। जिस समय उसकी लड़की बीमार हुई उसके पास पैसे नहीं थे। लड़की मां अंधी है।
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