जाने कैसे संविधान अब नहीं रहा पूर्ण प्रजातांत्रिक संविधान

Feb 09, 2017
जाने कैसे संविधान अब नहीं रहा पूर्ण प्रजातांत्रिक संविधान

गलत संविधान

सरकारों का काम है कानूनों का पालन करवाना. लेकिन वर्तमान में लागू संविधान ने सरकारों को ही कानून बनाने का अधिकार दे दिया तो सरकारों के बनाये अनुचित-ंउचयअव्यावहारिक कानूनों और अनुचित-ंउचयअव्यावहारिक न्याय, कर, अर्थ, षिक्षा और चिकित्सा नीतियों से और सरकारों के नाजायज टोलटैक्स और लूटपाट वाले टैक्सों से और सरकारों के व्यापार करने से देष में व्यापार नहीं ब-सजय़ रहा और व्यापार के नहीं ब-सजय़ने से बेरोजगारी ब-सजय़ गयी, रुपया गिर गया और देष की अर्थव्यवस्था, सुरक्षाव्यवस्था और न्यायव्यवस्था कमजोर हो गयी और देष डोनेषन के रूप में विदेषी भीख और विदेषी कर्जों का मोहताज हो गया. और जब तक वर्तमान में लागू संविधान लागू रहेगा तब तक रुपया गिरा रहेगा और देष विदेषी भीख और विदेषी कर्जों से ही चलेगा. क्योंकि कानून और न्याय, कर, अर्थ, षिक्षा और चिकित्सा नीति बनाना और टैक्स तय करना सरकारों का काम नहीं है और व्यापार करना राज्य का काम नहीं है. वर्तमान में लागू संविधान ने षासन चलाने के लिए प्रजा में से वोट द्वारा षासन चलाने वालों को तो चुन लिया, लेकिन प्रजा में तो कानूनीज्ञाता, न्यायविद्, अर्थविद्, षिक्षाविद्, चिकित्साविद् और समाजषास्त्री आदि भी तो है, लेकिन संविधान ने इनको संसद और विधानसभा के लिए आमंत्रित कर कानून और न्याय, कर, अर्थ, षिक्षा और चिकित्सा नीति बनाने का अधिकार नहीं दिया. इसलिए वर्तमान में लागू संविधान पूर्ण प्रजातांत्रिक संविधान नहीं है. कहा जा सकता है कि कानूनीज्ञाता, न्यायविद् अर्थविद्, षिक्षाविद्, चिकित्साविद् और समाजषास्त्री आदि भी चुनाव जीत कर संसद और विधानसभा में जाए लेकिन चुनाव जीत कर तो वे भी षासन चलाने वाली सरकारों का हिस्सा बन जाऐंगे. कानून और न्याय, कर, अर्थ, षिक्षा और चिकित्सा नीति बनाना और टैक्स तय करना अलग कार्य है और इसके लिए तो उपर्युक्त प्रतिभा वालों को आमंत्रित ही किया जा सकता है. राज्य कार्य तीन बातों में विभक्त हैः-ंउचय कानून बनाना, न्याय प्रणाली बनाना और षासन चलाना. ये तीनों कार्य पृथक-ंउचयपृथक है. अतः इन तीनों कार्यों को करने वाले भी पृथक-ंउचयपृथक व्यक्ति होना चाहिए. लेकिन वर्तमान में लागू संविधान में तीनों कार्य सरकारें ही कर रहीं है. इसलिए वर्तमान में लागू संविधान गलत है. विदेषी भीख और विदेषी कर्जों से चलने वाले कमजोर भारत को महाषक्ति बनने के लिये चाहिए पूर्ण प्रजातांत्रिक संविधान.
पूर्ण प्रजातांत्रिक संविधान

अधिकारः-ंउचय देष के सब नागरिक को समान अधिकार प्राप्त होगा और सबको अपने-ंउचयअपने धर्म के अनुसार जीने की और बोलने-ंउचयलिखने और व्यापार-ंउचयपेषा करने की तथा देष में कहीं भी जाने-ंउचयरहने की और सम्पति खरीदने-ंउचयबेचने की पूरी आजादी होगी. नि-ुनवजयोधः-ंउचय व्यापार करना राज्य का काम नहीं है, प्रजा का काम है. अतः सरकारें किसी भी रूप में व्यापार नहीं करेगी और विदेषों से व्यापार से संबंधित कोई भी करार नहीं करेगी. कानूनः-ंउचय कानून बनाने वाली संस्था संसद ही रहेगी, लेकिन उसका नाम रा-ुनवजयट्रसभा रहेगा. राज्यों में कानून बनाने वाली संस्था विधानसभा ही रहेगी.
रा-ुनवजयट्रसभा-ंउचयविधानसभा के सदस्य कानूनीज्ञाता, चिकित्साविद्, समाज-रु39याास्त्री आदि होंगे. कानून बनाना, टैक्स तय करना, कर, अर्थ, षिक्षा और चिकित्सा नीति बनाना रा-ुनवजयट्रसभा-ंउचयविधानसभा के काम होंगे. सर्वोच्च न्यायालय दे-रु39या भर से उपर्युक्त प्रतिभा वालों का चयन कर रा-ुनवजयट्रसभा सदस्य बनाएगा. यही प्रक्रिया राज्यों में विधानसभा सदस्यों के लिये उच्च न्यायालय करेंगे. नगरपालिका की नगरसभा के सदस्यों का चयन जिला न्यायालय और पंचायतों की ग्रामसभा के
सदस्यों का चयन न्यायालय करेंगे.

रु39याासनः-ंउचय वर्तमान में जो राज्यसभा है वह केन्द्रीय राज्यसभा कहलाएगी और दे-रु39या का -रु39याासन संचालन वहां से होगा. राज्यों में राज्यसभा की स्थापना होगी और राज्यों का -रु39याासन संचालन वहां से होगा. चुनावों में जो भी विजयी होंगे वे केन्द्रीय राज्यसभा व राज्यों में राज्यसभा के सदस्य होंगे. दे-रु39या में रा-ुनवजयट्रपति प्रमुख और राज्यों में मुख्यमंत्री प्रमुख होंगे. रा-ुनवजयट्रपति और मुख्यमंत्री का चुनाव विजयी सदस्यों में से विजयी सदस्य करेंगे. अन्य मंत्रियों की नियुक्तियां विजयी सदस्यों में से रा-ुनवजयट्रपति रा-ुनवजयट्रसभा की और मुख्यमंत्री विधानसभा की सम्मति से करेंगे. रा-ुनवजयट्रपति रा-ुनवजयट्रसभा की सम्मति से और मुख्यमंत्री विधानसभा की सम्मति से कार्य करेंगे. इसी तरह से नगरपालिका अध्यक्ष नगरसभा की सम्मति से और सरपंच ग्रामसभा की सम्मति से कार्य करेंगे. न्यायः-ंउचय न्यायसभा सदस्य न्यायविद् आदि होंगे. न्याय प्रणाली बनाना, न्यायाधी-रु39याों की नियुक्ति, वेतन, बदली, पदोन्नति, सेवामुक्ति, पेंषन आदि कार्य न्यायसभा के होंगे. सर्वोच्च न्यायालय दे-रु39या भर से उपर्युक्त प्रतिभा वालों का चयन कर न्यायसभा सदस्य बनाएगा. यही प्रक्रिया राज्यों में न्यायसभा सदस्यों के लिये उच्च न्यायालय करेंगे. उपर्युक्त सबका कार्यकाल पांच व-ुनवजर्या रहेगा. रा-ुनवजयट्रसभा, विधानसभा, नगरसभा और ग्रामसभा की अवहेलना करने वाले रा-ुनवजयट्रपति, मुख्यमंत्री, अध्यक्ष और सरपंच को पद से हटाने का अधिकार क्रम-रु39याः सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय और न्यायालय को होगा.

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