पुलिस के दल्ले पत्रकार सच्चे पत्रकारों के खिलाफ कितने मुकद्दमे दर्ज कराएँगे

Jan 30, 2017
पुलिस के दल्ले पत्रकार सच्चे पत्रकारों के खिलाफ कितने मुकद्दमे दर्ज कराएँगे

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है कितना जोर है बाजू-ए-कातिल में। इन पंक्तियों के साथ मैं अपने लेख का आगाज इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि अगर सच लिखना गुनाह है तो हम सच्चे पत्रकार यह गुनाह बार बार करेंगे? अब यह देखना है कि पुलिस के दल्ले पत्रकार सच्चे पत्रकारों के खिलाफ कितने मुकद्दमे दर्ज कराएँगे?

जौनपुर के पत्रकार रियाजुल हक़ ने फेसबुक पर सच ही लिखा था कि पत्रकारिता में दल्लों और चापलूसों की भरमार है। पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं के साथ फोटो खिंजवाकर खुद को तीस मार खाँ समझते हैं। जिनकी रगों में गुलामी का खून दौड़ रहा हो वो क्या पत्रकारिता की लाज रख पाएंगे। जिनको पत्रकारिता की परिभाषा तक का ज्ञान नही है वो अपने गले में कुत्ते का पट्टा डालकर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के आगे पीछे दुम हिलाते नजर आते हैं। पत्रकारिता के नाम पर दलाली करने वाले हरामखोरों अधिकारियों और नेताओं के तलबे चाटने से बेहतर है कि तुम भीख मांगों। तुम्हारे ऐसा करने से पत्रकारिता की लाज तो बरक़रार रहेगी।

दल्ले पत्रकारों ने तो पत्रकारिता का सत्यानाश कर दिया है। इन हरामखोरों की वजह से ईमानदार पत्रकार भी गेंहू के साथ घुन की तरह पिस जाते हैं। मैं भी रियाजुल हक़ की तरह तुम दल्ले पत्रकारों की खुआरी कर रहा हूँ। अगर तुमने अपनी माँ का दूध पिला है तो मेरे खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कराकर दिखाओ। कसम से अगर तुम दल्लों को छटी का दूध याद न दिला दिया तो मेरा नाम अमन पठान नही? मेरे प्यारे दल्ले पत्रकारों तुम्हें और तुम्हारे आकाओं को बता दूँ कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 हर भारतीय नागरिक को स्वतंत्रता के साथ अपनी बात कहने का अधिकार देता है। इसलिए कोई भी नागरिक अपनी बात कहने का अधिकार रखता है।
धन्य हैं जौनपुर के दल्ले पत्रकार और धन्यवाद के पात्र हैं पुलिस विभाग के हरामखोर अफसर ? जो ब्रिटिश हुकूमत की तरह सच्चे पत्रकारों पर अपनी कार्रवाई का चाबुक चला रहे हैं। बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66 ए को समाप्त कर दिया है। इसलिए कोई भी भारतीय नागरिक स्वतंत्रता के साथ सोशल मीडिया पर खुलकर अपने विचारों को जनता के समक्ष रख सकता है। पत्रकार रियाजुल हक़ ने तो अपने विचार में किसी व्यक्ति विशेष का नाम लिखे बिना पत्रकारिता को कलंकित करने वालों को समझाने का प्रयास किया था। ताकि वह अफसरों के तलबे चाटना छोड़ दें और पत्रकारिता की गरिमा को बरकरार रखने का प्रयास करें, लेकिन जौनपुर की पुलिस ने अपनी महानता का परिचय देते हुए सच लिखने वाले पत्रकार रियाजुल हक़ के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकद्दमा दर्ज कर लिया। मैं उस काबिल अफसर से यह पूंछना चाहता हूँ कि आप ये कैसे साबित करोगे कि रियाजुल हक़ ने किसके मान सम्मान को ठेस पहुंचाई है और पत्रकार ने क्या गलत लिखा है और हाँ दल्ले पत्रकारों बीच चौराहे पर जूते मार मारकर तुम्हारा मुंह लाल कर देना चाहिए। ताकि तुम्हारी दलाली से कीटाणु मर जाएँ और पत्रकारिता बदनाम होने से बच जाये।
(लेखक केयर ऑफ़ मीडिया के संपादक हैं, ये लेखक के निजी विचार हैं)
अमन पठान
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