गृह मंत्रालय के एक अधिकारी को पांच दिन की CBI हिरासत

May 17, 2016

दिल्ली की एक अदालत ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय में एक अवर सचिव को आर्थिक लाभ के लिए विभिन्न एनजीओ को एफसीआरए नोटिस जारी करने में कथित रूप से ईमानदारी नहीं बरतने के आरोप में दर्ज किये गये मामले में पांच दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा.

विशेष सीबीआई न्यायाधीश विनोद कुमार ने जांच एजेंसी को आनंद जोशी से पूछताछ के लिए उसे 20 मई तक की हिरासत में भेजने को मंजूरी दे दी. जोशी को पश्चिमी दिल्ली से रविवार को गिरफ्तार किया गया था.
जोशी की हिरासत की मांग करते हुए सीबीआई ने दलील दी कि गृह मंत्रालय में विभिन्न एनजीओ की फाइलें गुम हो गयी हैं तथा उन फाइलों को उसके घर से बरामद किया गया. इस अधिकारी को फाइलें अपने घर ले जाने की अनुमति नहीं है.
एजेंसी ने दावा किया कि वह न तो जांच में सहयोग कर रहा है तथा न ही सम्बद्ध तथ्यों का खुलासा कर रहा है. उससे हिरासत में इस बात की पूछताछ किए जाने की जरूरत है कि वे फाइलें उसके घर कैसे पहुंची.
सीबीआई ने अदालत में आरोप लगाया कि जोशी ने एफसीआरए 2010 के तहत दर्ज की गयी बड़ी संख्या में एनजीओ:सोसाइटियों को ईमानदारी न बरते हुए मनमाने ढंग से नोटिस जारी किये. नोटिस उन एनजीओ को जारी किये गये जिन्होंने विदेशी योगदान की पर्याप्त राशि हासिल की.
सीबीआई ने कहा कि इनमें से कुछ संगठन केयर इंडिया, स्नेहालया चैरिटेबल ट्रस्ट, इंडियन एचआईवी:एड्स एलायंस और आल इंडिया प्राइमरी टीचर्स फेडरेशन हैं. उसने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया तथा जोशी ने मांग रखी एवं उसे कुछ प्राप्ति भी हुई.
उसने कहा कि जब सीबीआई दल उसके घर गया तो वह वहां नहीं थे तथा उनका मोबाइल फोन भी 11 से 15 मई तक बंद रहा. वह एक गलत पत्र रखकर घर छोड़कर चले गये थे.
बहरहाल, हिरासत पर दिये जाने के अनुरोध का जोशी के वकील ने विरोध किया. वकील ने कहा कि मोबाइल बंद नहीं किया गया बल्कि वह उज्जैन में गुम हो गया था. उन्होंने दावा किया कि जोशी के 24 वर्ष के लंबे करिअर में उसे एक भी आफिस मेमो नहीं जारी किया गया.
जोशी को रविवार को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह सीबीआई की विशेष अपराध शाखा के दल द्वारा पूछे गये सवालों का संतोषप्रद उत्तर नहीं दे पाये. इन सवालों में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की सबरंग ट्रस्ट से संबंधित फाइलों के गुम होने से संबंधित सवाल शामिल थे.
जोशी 11 मई को गाजियाबाद के इंदिरापुराम स्थित अपने घर से लापता हो गये तथा उन्हें रविवार को पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर क्षेत्र से हिरासत में लिया गया और पूछताछ के लिए सीबीआई मुख्यालय लाया गया.
जोशी एवं कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्ट गतिविधियों में संलिप्त होने तथा विदेशी योगदान नियमन कानून (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत की गयी विभिन्न एनजीओ को मनमाने ढंग से नोटिस जारी करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया. इन एनजीओ में सबरंग ट्रस्ट शामिल हैं.
जोशी ने आरोपों से इंकार किया है तथा इसके बजाय वरिष्ठ अधिकारियों पर यह आरोप लगाया कि एनजीओ को क्लीन चिट देने के लिए उन पर दबाव डाला गया. अपना मकान छोड़ने से पहले उन्होंने पत्र लिखा जिसमें यह दावा किया गया कि हाल के महीनों में उनका काफी मानसिक उत्पीड़न किया गया.

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