हाई कोट ने उठाया मुद्दा,शादी से पहले क्यों जरूरी ‘रोके’ की स्टैंप?

May 02, 2017
हाई कोट ने उठाया मुद्दा,शादी से पहले क्यों जरूरी ‘रोके’ की स्टैंप?

रोका का मतलब तो हम सब जानते हैं रोके का मतलब होता है कि लड़की वालों की तरफ से लड़कों को एक शगुन दिया जाता है जिसको एक टोकन भी हम कह सकते हैं। जिसका मतलब यह होता है कि लड़का लड़की भविष्य में शादी के बंधन में बंध जाएंगे। पंजाब में इस सेरेमनी को रोका कहा जाता है और देशों में अलग अलग हिस्सों में अलग अलग नाम से इसको जाना जाता है।

हाल ही में उच्च न्यायालय में एक बेंच ने एक रस्म के बारे में कड़ा विरोध किया है एक महिला ने परिवारिक कोर्ट में अपने पति के खिलाफ तलाक को लेकर एक केस दर्ज करवाया है इस केस में पति पत्नी ने एक दूसरे पर यह आरोप लगाया है। कि उन्होंने रोके के समय पर शगुन और गिफ्ट दिए गए थे महिला ने यह शिकायत की है कि उसके पति और उसके पति के परिवार को उसके पिता ने जो शगुन दिए थे उससे उसका पति खुश नहीं है।

रोका जैसी सेरेमनी 25 साल पहले निभाई जाती थी। इसका मतलब यह होता था कि लड़की के परिवार वाले लड़के को और उनके परिवार को एक शगुन देते थे जिससे यह पक्का हो जाता था कि भविष्य में यह दोनों एक दूसरे का साथ निभाएंगे और जीवन साथी बनेंगे।

परंतु अब आज के जमाने में इस बात को एक बिजनेस समझा जा रहा है जी हां रोका का मतलब तो यही हुआ ना की लेनदेन। जैसे हम दुकानों पर जाते हैं कोई सामान खरीदने से पहले उसकी बुकिंग कर देते हैं उसी तरह रोका में भी लड़के को बुक कर लिया जाता है। तो अब समाज और महिला यह प्रश्न उठाना चाहती है कि क्या शादी एक सौदा और समझोता है।

आजकल के जमाने में लड़का और लड़की दोनों आर्थिक रुप से स्वतंत्र हो गए हैं। और लव मेरिज भी आजकल कोई बड़ी बात नहीं है फिर भी उसके बावजूद भी आज कल भी रोके की रस्म निभाई जाती है। जिसकी जरूरत नहीं है। आखिर में समाज यही सवाल पूछना चाहता है कि रोका सेरेमनी क्यों की जाती है। क्या शादी एक समझौता है इसीलिए हाई कोर्ट ने इस विचारधारा को सामाजिक तौर पर बुरी नजर से देखता है।

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