ड्रग्स की लत में “ग्लोबल औसत” से आगे निकला पंजाब : रिपोर्ट

Jun 09, 2016

पंजाब के ड्रग्स समस्या पर बनी फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को सेंसर की अनुमति मिलना या नहीं मिलना, इस समस्या का बस एक पहलू है. सरकार को इस बारे में काफी विस्तार से जवाब देना होगा क्योंकि यह कहना कि फिल्म की मदद से पंजाब को बदनाम किया जा रहा है, सही तर्क नहीं है.

आंकड़े बताते हैं कि पंजाब सरकार अभी तक राज्य में फैले ड्रग्स की समस्या का समाधान नहीं खोज पाई है.

पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल का कहना है कि इस फिल्म की मदद से पंजाब की अकाली और बीजेपी की गठबंधन सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि सीमा पार से होने वाली तस्करी के बाद पंजाब में सबसे ज्यादा ड्रग्स की जब्ती की जाती है जबकि राज्य को इसके लिए बदनाम किया जाता है.

बादल का कहना है कि राज्य में ड्रग्स लेने वालों की संख्या के बारे में भी विभिन्न सर्वे और रिपोर्ट्स गलत बताती हैं. अगर हम आंकड़ों और दावों को हटा भी दे तो युवाओं में ड्रग्स की आदत बड़ी समस्या है. विश्लेेषकों की माने तो नेता और पुलिस के गठजोड़ के बिना राज्य में इतने बड़े पैमाने पर ड्रग्स का कारोबार नहीं चलाया जा सकता.

राज्य के एक बड़े यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले प्रोफेसर ने अपना नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया, ‘हमारे कैंपस में कार से आने वाले लड़कों की संख्या में बढ़ोेतरी होने के बाद पार्किंग को लेकर समस्या होने लगी. हमने इस समस्या का समाधान करने के लिए फैकल्टी और छात्रों की पार्किंग को अलग कर दिया. बाद में हमें पता चला कि छात्रों के बड़ी संख्या में कार से आने के पीछे ड्रग्स की तस्करी जैसा कारण है. कारों के नेटवर्क का इस्तेमाल अक्सर ड्रग्स की तस्करी में होता है और इनमें कई बार हथियार भी भरे होते हैं.’
राज्य में सबसे अधिक कॉलेज के छात्र ड्रग्स का सेवन करते हैं. छात्रों के बीच सबसे अधिक सिंथेटिक ड्रग्स चित्ता का सेवन किया जाता है. सूत्रों की मानें तो इस ड्रग्स को कई दवाइयों को मिलाकर बनाया जाता है और फिर छोटी मात्रा में इनकी आपूर्ति की जाती है.

रेडियो पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शिव इंदर सिंह बताते हैं, ‘आपको हर गांव में ड्रग्स का सप्लायर्स मिल जाएगा. गांव वाले यह बात जानने के बावजूद कि उस आदमी की वजह से उनके बच्चों का भविष्य बिगड़ रहा है, डीलर को हाथ नहीं लगा पाते क्योंकि उसे वहां के स्थानीय नेताओं और पुलिस का संरक्षण मिला होता है. इन ड्रग्स को धार्मिक स्थलों पर भी भेजा जाता है.’

सिंह पूछते हैं, ‘क्या मानव के जीवन को बस आंकड़ों में नापा जा सकता है. आपको इस समस्या की गंभीरता समझने के लिए गांवों का दौरा करना होगा.’

उन्होंने कहा कि चित्ता को छोटे यूनिट में बनाया जाता है. इसलिए सरकार का यह कहना बेतुका है कि ड्रग्स की वजह से राज्य को बदनाम किया जा रहा है.
शिव इंदर ने बताया, ‘चित्ता के नशे के आदी युवा हर दिन इस पर 500 से 1,000 रुपये खर्च करते हैं. जब उन्हें इसके लिए पैसा नहीं मिलता है तब वह इसके लिए अपराध की तरफ मुड़ जाते हैं.’

ड्रग्स समस्या को लंबे समय देख रहे एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया, ‘कोई छात्र अपने दोस्तों की सोहबत में ड्रग्स लेना शुरू करता है. एक बार कोई दोस्त उसे नशा कराता है और फिर वह इसका आदी बन जाता है.’ हीरोइन या अन्य ड्रग्स का इस्तेमाल महंगा पड़ता है, इसलिए चित्ता का इस्तेमाल पंजाब में खूब होता है.

मामले की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि राज्य सरकार ने साल की शुरुआत में 7,416 कॉन्स्टेबल की भर्ती की घोषणा की. सरकार ने भर्ती के पहले उम्मीदवारों को ड्रग्स टेस्ट भी देना था. बादल ने कहा कि सभी उम्मीदवारों के अन्य टेस्ट के पहले ड्रग्स टेस्ट लिया गया. ऐसा पहले भी होता रहा है.

बादल ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती प्रक्रिया के दौरान कोई भी उम्मीदवार नशे का आदी नहीं पाया गया.

हाल ही में अमृतसर में महिलाओं के लिए ड्रग्स रिहैबिलिटेशन सेंटर खोला गया है. राज्य का यह पहला सेंटर है जहां महिलाओं को नशे की लत छुड़ाने के लिए लाया जाता है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की प्रधान सचिव विनी महाजन ने कहा कि बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के ड्रग्स से पीड़ित लोगों की सही संख्या का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है.

सूत्रों की माने तो महिलाएं शराब के अलावा नींद की गोली का सेवन करती हैं. महिलाओं में चित्ता का सेवन बेहद कम है.

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने ही एक जज की रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया था जिसमें यह बात सामने आई थी कि पंजाब के फरीदकोट जिले के जेल में मार्च में एक मेडिकल टेस्ट में 251 कैदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे. सूत्रों की माने तो यह घटना साफ बताती है कि जेल के भीतर भी कैदियों को ड्रग्स की आपूर्ति की जा रही है.

सुखबीर सिंह बादल ने हाल ही में पुलिस को ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है. उन्होंने पुलिस को एक महीने के भीतर ड्रग्स सप्लाई का नेटवर्क तोड़ने का आदेश दिया है.

एसएसपी स्तर के अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ड्रग्स माफिया के खिलाफ की जाने वाले कार्रवाई में किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि राजनीतिक स्तर पर आम आदमी पार्टी अकाली दल पर राज्य में ड्रग्स माफिया को बढ़ावा देने का आरोप लगा रही है. आप ने बिक्रम सिंह मजीठिया पर निशाना साधते हुए कहा कि वह राज्य के सबसे बड़े ड्रग्स माफिया हैं.

मंजीत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आशीष खेतान और संजय सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कर रखा है. वहीं उड़ता पंजाब विवाद पर राहुल गांधी की टिप्पणी भी सुर्खिंया बनी हुई हैं. गांधी ने 2012 में कहा था कि पंजाब का 70 फीसदी युवा नशे की गिरफ्त में है.

गांधी ने ट्वीट कर कहा था, ‘पंंजाब में ड्रग्स की समस्या है. उड़ता पंजाब पर सेंसर लगाने से यह समस्या खत्म नहीं होगी. सरकार को यह सच स्वीकार करते हुए उसके समाधान की कोशिश करनी चाहिए.’

अकाली दल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी को यह बताने की चुनौती दे डाली कि आखिर यूपीए के 10 सालों के शासनकाल के दौरान राज्य में सीमा पार से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए क्या किया गया.

अकाली दल के महासचिव सुुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा कि पंजाब में ड्रग्स समस्या कांग्रेस की सरकारों का नतीजा है और यह बात कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप में कबूल कर चुके हैं. सिंह ने 2014 में कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर प्रताप सिंह बाजवा पर ड्रग्स माफिया के साथ काम करने का आरोप लगाया था.

आने वाले दिनों में ड्रग्स समस्या राज्य की सियासत में अहम मुद्दा बना रहेगा.

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