सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और गुजरात सरकारों से की कड़ी पूछताच

Apr 08, 2016

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सूखे के मुद्दे से निपटने में गंभीरता नहीं दिखाने पर गुजरात और हरियाणा सरकारों को आड़े हाथ लिया.

न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने दोनों राज्यों में सूखे से प्रभावित क्षेत्रों पर अस्पष्ट आंकड़े पेश करने पर दोनों राज्य सरकारों की आलोचना की. पीठ ने राज्यों से पूछा कि अगर चुनाव होंगे तो क्या सारा काम रूक जाएगा.

पीठ ने टिप्पणी की, ”आपने ये सब क्यों पेश किया? आपको ये कागजात अपने कार्यालय में मिले और आपने यहां उन्हें पेश कर दिया? इस मुद्दे पर आप जो दिखा रहे हैं क्या यह गंभीरता है? लोग मर रहे हैं. हरियाणा में आपके सामने जो हो रहा है वह कोई पिकनिक नहीं है.”

मामला की सुनवाई शुरू होने पर केन्द्र ने इस मामले को स्थगित करने का अनुरोध किया क्योंकि पैरवी के लिए कोई विधि अधिकारी नहीं था. पीठ ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि केन्द्र इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है.

शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद की अनुपस्थिति पर नाखुशी जताई.

जब पीठ ने पिंकी की उपस्थिति के बारे पूछा तो एक कनिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि एएसजी पहले से तय एक मामले में व्यस्त हैं.

पीठ ने जवाब दिया, ”उच्चतम न्यायालय के दो न्यायाधीशों के पास सिर्फ यह काम है कि वे आएं और यहां बैठकर घड़ी देखें.” संदेश पहुंचने पर एएसजी आनंद सुनवाई के लिए अदालत में पहुंची.

सुनवाई के दौरान, गुजरात सरकार ने पीठ को बताया कि तीन जिलों के 526 गांव सूखे से प्रभावित घोषित किये गये हैं. उसने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया गया है और इस संबंध में एक अप्रैल को एक अधिसूचना जारी हुई है.

इसके बाद अदालत ने गुजरात से पूछा कि उसे सूखा घोषित करने में एक अप्रैल तक का इंतजार क्यों किया जब कि पिछले साल सितंबर में ही स्थिति साफ थी.

गुजरात सरकार ने जवाब दिया कि स्थनीय चुनावों के कारण राज्य में सूखा घोषित करने में देरी हुई.

इस पर पीठ ने पूछा, ”अगर चुनाव होंगे तो क्या सब काम रूक जाएगा?”

बिहार सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य में सूखे जैसी कोई स्थिति नहीं है और जहां कम बारिश हुई है वहां क्षेत्र में सभी तरह की मदद दी जा रही है.

 

 

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