गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड, कोर्ट 24 मुजरिमों को आज सुना सकती है सजा

Jun 09, 2016

एक विशेष एसआईटी अदालत गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार कांड में दोषी ठहराए गए 24 मुजरिमों को गुरुवार को सजा सुना सकती है.

गुजरात दंगे के दौरान इस नरसंहार में पूर्व कांग्रेस सासंद एहसान जाफरी समेत 69 लोग मारे गए थे.

अभियोजन पक्ष ने मांग की है कि सभी मुजरिमों को मृत्युदंड या उम्रकैद से कम सजा न दी जाए. दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वकीलों ने यह कहते हुए इसका विरोध किया था कि यह घटना स्वत:स्फूर्त थी और उसके लिए उकसावे की पर्याप्त गतिविधियां थीं.

न्यायाधीश पी बी देसाई ने दो जून को 11 व्यक्तियों को हत्या समेत कई अपराधों तथा 13 अन्य व्यक्तियों को हलके अपराधों में दोषी ठहराया था. अदालत ने 36 अन्य को बरी कर दिया था.

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मुजरिमों के लिए सजा तय करने से पूर्व सोमवार को अभियोजन, पीड़ितों और मुजरिमों के वकीलों ने सजा के बारे में अपनी अपनी दलीलें पेश कीं, जो गुरुवार को भी जारी रह सकती हैं. दलीलें पूरी होने के बाद सजा सुनाई जा सकती है.

उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) का प्रतिनिधित्व कर रहे लोक अभियोजक आर सी कोडेकर ने सजा पर बहस के दौरान मांग की थी कि सभी 24 मुजरिमों को मृत्युदंड या उम्रकैद से कम सजा नहीं दी जाए.

कोडेकर ने कहा कि सभी 24 मुजरिम भादसं की धारा 149 के तहत दोषी ठहराए गए हैं और सजा सुनाते समय इस बात को ध्यान में रखा जाए. धारा 149 कहती है कि अपराध के समय अपराध करने वाली जमात का हर सदस्य उस अपराध का दोषी है.

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उन्होंने अदालत से कहा कि अपराध का तरीका एकदम क्रूर, बर्बर और अमानवीय था. लोगों को जिंदा फूंक दिया गया.

पीड़ितों के वकील एम एम वोरा ने भी आरोपियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की और कहा कि हर अपराध की सजा साथ साथ नहीं चलनी चाहिए ताकि वे अधिकाधिक समय जेल में रहें.

हालांकि बचाव पक्ष के वकील ने मृत्युदंड या अधिकतम सजा का यह कहते हुए विरोध किया कि यह घटना स्वत:स्फूर्त थी और इसके लिए उकसावे की पर्याप्त गतिविधियां थीं.

मुजरिमों के वकील अभय भारद्वाज ने अदालत से कहा, ‘‘चूंकि साजिश की बात स्थापित नहीं हो पायी है, ऐसे में आंशिक रूप से भरोसेमंद सबूतों पर अदालत से मृत्युदंड की मांग करना उपयुक्त नहीं है.’’

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दंगे के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी पर 400 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया था और पूर्व सांसद जाफरी समेत वहां के बाशिंदों को मौत के घाट उतार दिया था. यह दंगा साबरमती एक्सप्रेस के एस 6 डिब्बे में गोधरा स्टेशन के समीप आग लगा दिये जाने बाद हुआ था. एस-छह में कार सेवक यात्रा कर रहे थे और आग लगा दिये जाने की घटना में 58 लोग मारे गए थे.

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