गुलबर्ग सोसायटी मामले में सुनाये गये फैसले से संतुष्ट नहीं हैं जकिया जाफरी

Jun 02, 2016

अपने पति और पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी को न्याय दिलाने के लिए 14 वर्ष से संघर्षरत जकिया जाफरी ने वर्ष 2002 के गुलबर्ग सोसायटी मामले को लेकर सुनाये गये फैसले पर असंतोष जाहिर किया.

उन्होंने कहा कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगी.

जकिया ने गुरुवार को कहा कि वह फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसमें शामिल सभी लोगों को दंडित किया जाना चाहिए था क्योंकि उन्होंने लोगों की हत्या की और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इन सब चीजों को जानती हूं क्योंकि मैंने नरसंहार को देखा है. मैं सबको दोषी ठहराये जाने की उम्मीद कर रही थी..किस प्रकार उन्होंने लोगों की हत्या की. किस प्रकार उन्हें बेघर किया, मैंने इन सब चीजों को अपनी आंखों से देखा.’’

जकिया ने कहा, ‘‘मैं मृत्युदंड की मांग नहीं कर सकती लेकिन अधिकतम सजा दी जानी चाहिए. उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए ताकि वे अपने परिवार और बच्चों से दूर रहने की पीड़ा समझ सकें.’’

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उन्होंने कहा, ‘‘मेरी लड़ाई खत्म हो जानी चाहिए थी लेकिन आज के फैसले को देखते हुए यह जारी रहेगी.’’

गुलबर्ग सोसायटी के पीड़ितों के लिए संघर्ष कर रही सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड ने कहा कि वे लोग गहराई से फैसले का अध्ययन करेंगे और ऊपरी अदालत में अपील करेंगे.

तीस्ता ने कहा, ‘‘हम लोग फैसले का अध्ययन करेंगे, हम लोगों का निश्चित रूप से यह मानना है कि यह आपराधिक साजिश का मामला है और इसको लेकर अपील दायर कर हम अपने अधिकार का प्रयोग करेंगे.’’

एहसान जाफरी के बेटे तनवीर ने 36 लोगों को दोषमुक्त किये जाने पर सवाल उठाया.

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तनवीर ने कहा, ‘‘यह एक बड़ी सोसायटी थी, जिसमें 15-20 बंगले थे और 10 अपार्टमेंट थे जिसमें 400-500 लोग रहते थे. ऐसे में किस तरह 24 लोग 24 घंटे तक लोगों को लूट सकते थे, पूरी सोसायटी को जला सकते थे और नृशंस तरीके से किस प्रकार उतने लोगों को मार सकते थे. ऐसे में यह बहुत अजीब प्रतीत हो रहा है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘24 लोगों को दोषी ठहराये जाने को लेकर हम लोग संतुष्ट हैं लेकिन जहां तक दोषमुक्त किये गये 36 लोगों का सवाल है तो अपने वकीलों से चर्चा करने के बाद हम लोग अपील दायर करेंगे.’’

इस नरसंहार में एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की मौत हो गयी थी.

यह घटना 2002 के गुजरात दंगों के संबंध में दर्ज नौ मामलों में शामिल थी, जिनकी जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी कर रही थी. इस घटना से एक दिन पहले साबरमती एक्सप्रेस की एस-6 कोच को गोधरा रेलवे स्टेशन के पास जला दिया गया, जिसमें 58 कारसेवक मारे गये थे.

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इसी बीच 2002 के गुजरात दंगों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) की अगुवाई करने वाले आर के राघवन ने कहा कि गुलबर्ग सोसायटी मामले पर सुनाये गये फैसले को लेकर उनके विचार मिले-जुले हैं.

पूर्व सीबीआई निदेशक राघवन ने कहा, ‘‘मेरे विचार मिले-जुले हैं क्योंकि कुछ लोगों को दोषी ठहराया गया है जबकि अन्य को बरी कर दिया गया है. आदेश देखने के बाद ही मैं टिप्पणी कर सकूंगा.’’

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