गुजरात: समढियाला गांव पहुंचे राहुल गांधी, पीड़ित दलित युवकों के परिजनों से मिले

Jul 21, 2016

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को गुजरात के उना के मोटा समढियाला गांव पहुंचे. यहां उन्होंने पीड़ित दलित युवकों के परिजनों से मुलाकात की.

गिर सोमनाथ जिले में ऊना कस्बे के एक गांव में दलितों को बर्बरता से पीटे जाने को लेकर गुजरात के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहा. कई राजनीतिक नेताओं ने पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात की.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पीड़ितों के परिजनों से मिलने ऊना के मोटा समढियाला गांव पहुंचे. इस दौरान उनके साथ कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा भी थीं.

पुलिस ने बताया कि राजकोट एवं मेहसाणा में बुधवार देर रात हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं और प्रदर्शनकारियों ने लिम्बडी और सूरत में मार्च निकाला.

उन्होंने बताया कि राजकोट में बीआरटीएस बस अड्डे को क्षतिग्रस्त किया गया और मेहसाणा जिले के ऊंझा में एक सार्वजनिक परिवहन बस में बुधवार देर रात तोड़फोड़ की गई. हालांकि इस दौरान किसी को चोट नहीं पहुंची. छिटपुट घटनाओं को छोड़कर गुरुवार को अभी तक कोई बड़ी घटना दर्ज नहीं की गई.

अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के मद्देनजर बुधवार को निलंबित रहने वाली राज्य परिवहन बस सेवा गुरुवार को बहाल कर दी गई.

दलित प्रदर्शनकारियों ने सूरत के ऊधना में एक रेलवे स्टेशन के निकट एक ट्रेन को कुछ देर के लिए रोकने की कोशिश की. हजारों प्रदर्शनकारियों ने रैली निकाली और कुछ देर के लिए अहमदाबाद आने वाली नवजीवन एक्सप्रेस का मार्ग बाधित कर दिया. बाद में पुलिस ने पटरियां खाली कराईं.

सुरेंद्रनगर जिले के लिम्बडी में भी एक रैली निकाली गई.

दलितों द्वारा बुधवार को आहूत बंद के दौरान हुए नुकसान और जबरन दुकानें बंद कराए जाने के मद्देनजर अरावली जिले के मोडासा में गुरुवार को दुकानें बंद रहीं.

पुलिस ने बताया कि बंद लागू कराने की कोशिश करते हुए कुछ दलितों ने बुधवार को कई दुकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया था जिसके बाद दुकानदारों एवं प्रदर्शनकारियों दोनों के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं.

इस बीच, राकांपा नेता प्रफुल पटेल, गुजरात में उनकी पार्टी के विधायक, जयंत पटेल और कंधाल जडेजा ने पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की और दो लाख रुपए का मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा. इसके बाद वे अस्पताल में भर्ती पीड़ितों से मिलने के लिए राजकोट रवाना हो गए.

बाद में पटेल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को पीड़ितों तक पहुंचने में नौ दिन लग गए जो एक लंबा समय है.

उन्होंने कहा, ‘‘जब पूरा राज्य जल रहा हो और लोगों के भीतर अविश्वास की भावना हो तो जन प्रतिनिधि होने के नाते, हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम पीड़ित परिवार के सदस्यों के प्रति सहानुभूति प्रकट करें और उन्हें अहसास कराएं कि हम मुश्किल के समय उनके साथ हैं.’’
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