गुजरात: अब गोसेवा आयोग जारी करेगा गोरक्षकों के लिए पहचान पत्र

Aug 18, 2016

गांधीनगर। गुजरात के ऊना में गोरक्षा के नाम पर दलितों की बर्बरतापूर्वक पिटाई के एक महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुप्पी तोड़ी। विदेशी मीडिया ने अपने संपादकीय में जब इस घटना पर सवाल उठाए तो मामला वैश्विक होते देख पीएम को बयान देना पड़ा। अब गुजरात से खबर आ रही है कि फर्जी गोरक्षकों की पहचान के लिए कथित गोरक्षक संगठनों ने अब अपने सदस्यों को पहचान पत्र देने का फैसला किया है। गुजरात का गोसेवा आयोग ऐसा ही एक संगठन है। आयोग अपने सदस्यों को गोरक्षक का पहचान पत्र जारी करेगा और प्लास्टिक खाने से होने वाली गायों की मौत को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाएगा।

गोरक्षा के नाम पर दलितों के साथ की जा रही हिंसा और मार-पीट पर प्रतिक्रिया जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 6 अगस्त को राज्य सरकारों से कथित गोरक्षकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि करीब 80 फीसदी गोरक्षक फर्जी हैं और वे गो रक्षा की आड़ में असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं।

एनबीटी के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. वल्लभ काठी रिया इस संगठन के चेयरमैन हैं। उन्होंने बताया कि वह इसके सदस्यों को पुलिस वेरिफिकेशन कराने पर भी विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया, ‘राज्य में करीब 500 गोशालाएं हैं जिन्हें सरकार संचालित करती है। जबकि करीब 2000 निजी संगठनों द्वारा संचालित किए जाते हैं। हम इन संगठनों के साथ लोगों को जोड़ने पर विचार कर रहे हैं। हम इन सभी का पुलिस वेरिफिकेशन कराने पर भी विचार कर रहे हैं ताकि असामाजिक गतिविधियों में संलिप्तता जैसे मामलों को रोका जा सके।’ संगठन ने बताया कि फिलहाल उसके पास 210 करोड़ रुपयों का बजट मौजूद है।

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