गुजरात: दलितों का शव उठाने से इनकार करने पर सड़ रहे हैं मरे हुए जानवर

Jul 28, 2016

ऊना। गुजरात के ऊना में दलित समुदाय द्वारा मरे हुए जानवरों का शव उठाने और उनका निपटान करने से इनकार करने के बाद यहां बदतर हालात हो गए हैं। इस इंकार के कारण सौराष्ट्र और उत्तरी गुजरात में कई शव सड़ रहे हैं। इनके सड़ने से लोगों को स्वास्थय संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सुरेन्द्रनगर में लोगों ने कहा कि गणपति रेलवे स्टेशन क्रॉसिंग पर एक भैंस की लाश सड़ गई है। इसकी वजह से आसपास के इलाके में असहनीय बदबू फैल गई है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार गुजरात में लगभग 1 करोड़ गाय और भैंस हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार जानवरों के मरने की दर लगभग 10% होती है। प्रतिदिन करीब 2500 जानवर मरते हैं।

बीमार और बूढ़े जानवरों को भेजे जाने की जगह ‘पंजरापोल’ में काम करने वाले लोगों ने भी बीमार पशुओं को लेने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि दलितों के पशुओं के शवों का निपटान करने से इनकार करने के बाद यहां कई शव पड़े हुए हैं, जिसके कारण नए पशुओं को नहीं लिया जा सकता। मरी हुई गायों का निपटान करना एक मुश्किल काम हो गया है। राज्य सरकार के गोसेवा और गोचर विकास बोर्ड के अनुसार गुजरात में 283 पंजारपोल हैं जिनमें 2 लाख से ज्यादा पशु हैं। इनमें से 100 अकेले सौराष्ट्र और कच्छ में हैं।

दलित ऐक्टिविस्ट नातु परमार ने कहा कि यह पहली बार है कि दलित समुदाय इस तरीके से लामबंद हुआ है। पशुओं के निपटान से इनकार करने के लिए पूरा समुदाय एक साथ खड़ा हुआ है। मालूम हो 2 हफ्ते पहले ऊना में मरे हुए पशुओं का चमड़ा उतारने के लिए दलित समुदाय के कुछ युवकों की बेरहमी से पिटाई की गई थी। इसके बाद से दलित समुदाय पूरे तरीके से एकजुट हो गया है।

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