डंपर कांड में सरकार ने वकील को दी थी एक पेशी के 11 लाख रुपये, शिवराज सरकार पर अब उठे सवाल

Apr 07, 2017
डंपर कांड में सरकार ने वकील को दी थी एक पेशी के 11 लाख रुपये, शिवराज सरकार पर अब उठे सवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मानहानि केस में वकील रामजेठमलानी को फीस दिए जाने के मामले में हमलावर हुई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए मध्यप्रदेश से अच्छी खबर नहीं आ रही है। क्योंकि यहां के डंपर कांड के मामले में उच्च न्यायालय में पैरवी करने वाले अधिवक्ता उदय ललित को सरकार ने 11 लाख रुपये प्रति पैरवी देने का फैसला लिया था। सरकार द्वारा वर्ष 2011 में जारी आदेश गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राज्य की सियासत गर्मा गई है। वर्ष 2007 में कथित तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के नाम पर चार डंपर खरीदने का मामला सामने आया था। इस पर रमेश साहू ने इसकी शिकायत लोकायुक्त में की, जिसे स्वीकार नहीं किया गया तो उसने भोपाल की भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में याचिका दायर की। इस याचिका पर अदालत ने लोकायुक्त को प्रकरण दर्ज को करने कहा।

 
साहू ने गुरुवार को आईएएनएस को बताया कि लोकायुक्त ने इस मामले की जांच कर खात्मा रिपोर्ट लगाकर न्यायालय में पेश किया। इसके बाद वह सेशन कोर्ट गए जहां से भी मामला खारिज हुआ। उसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय जबलपुर में अपील की, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

इस मामले में मुख्यमंत्री चौहान व उनकी पत्नी साधना सिंह व अन्य को आरोपी बनाया गया।

साहू के मुताबिक, सरकार ने इस मामले की सुनवाई के लिए उदय ललित को 11 लाख रुपये प्रति पेशी के लिए मानदेय तय किया। यह सरकारी धन का दुरूपयोग था। ललित सिर्फ एक पेशी में ही अदालत में आए थे।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने कहा, “दिल्ली में भाजपा, केजरीवाल द्वारा उनके वकील राम जेठमलानी को दी जाने वाली फीस को जनता के पैसों को सरकार के खजाने में डाका बता रही है। वहीं मध्यप्रदेश में उन्हीं की पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में लंबित दांडिक पुनरीक्षण क्र.1919/2011 रमेश साहू विरुद्ध शिवराज सिंह चौहान के मामले में राज्य सरकार ने दिल्ली के वरिष्ठ वकील उदय ललित को 11 लाख रुपये प्रति पेशी दिए जाने की शर्त पर पैरवी करने के लिए नियुक्त किया गया था और यह भी सुनिश्चित किया गया था कि यह भुगतान सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा किया जाएगा।”

इस संबंध में विधिवत आदेश मध्यप्रदेश शासन व विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने नौ दिसंबर, 2011 को जारी किए थे।

मिश्रा ने केजरीवाल प्रकरण में वकील की फीस को जनता के धन की बर्बादी व सरकार के खजाने में डाका बताने वाली भाजपा से पूछा है कि डंपर कांड के आरोप से बचने के लिए शिवराज सिंह द्वारा राज्य सरकार के कोष से खर्च की गई यह बड़ी धनराशि क्या ‘पवित्र मानव सेवा’ को समर्पित थी? उन्होंने भाजपा को सलाह दी है, “जिनके घर खुद कांच के बने हों, उन्हें दूसरों के घर में पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।”

मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एस.के. मिश्रा ने आईएएनएस से कहा कि यह प्रकरण न तो मानहानि का था और न ही इस मामले में उच्च न्यायालय ने शिवराज सिंह चौहान को नोटिस जारी किया था। इस प्रकरण में लोकायुक्त ने अभिवक्ता (प्लीडर) के तौर पर उदय ललित की पैरवी के लिए मांग की गई थी, जिसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने अनुमति दी थी।

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