आये अच्छे दिन: सरकार ने बैंकों को पैसे देने से किया मना, अपना ही पैसा जमा करने पर देना होगा पैसा

Mar 09, 2017
आये अच्छे दिन: सरकार ने बैंकों को पैसे देने से किया मना, अपना ही पैसा जमा करने पर देना होगा पैसा

सरकार ने देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक से 1 अप्रैल से अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर जुर्माना लगाने के निर्णय पर भी फिर से विचार करने के लिए कहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एसबीआई समेत प्राइवेट सेक्टर के बैंक HDFC, ICICI और AXIS बैंक ने ब्रान्च से तय लिमिट से ज्यादा पैसे निकालने और तय बार से ज्यादा ट्रांजैक्शन करने पर लेवी चार्ज लगाने की घोषणा की गई थी।

SBI की ओर से मिनिमम बैलेंस बनाए रखने को अनिवार्य बताते हुए तय रकम न होने पर जुर्माना लगाने की जानकारी दी थी। महानगरीय इलाकों में खातों के लिए न्यूनतम 5,000 रुपये, शहरी क्षेत्रों में 3,000, अर्ध शहरी क्षेत्रों में 2,000 तथा ग्रामीण इलाकों में 1,000 रुपये न्यूनतम बैलेंस रखना जरूरी होगा। खातों में न्यूनतम बैलेंस नहीं रहने पर 1 अप्रैल से जुर्माना लगाने की बात कही थी।

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SBI के नए चार्जेज़ यहाँ पढ़े :-
1. अगर आपका सेविंग्स अकाउंट है तो 1 अप्रैल से आप सिर्फ तीन बार ही मुफ़्त में अपने खाते में पैसे जमा कर सकते हैं। इसके बाद पैसे जमा करने पर आपको हर बार पैसे जमा करने पर 50 रूपए बैंक आप से लेगा। शायद ऐसा पहली बार हो रहा है जब आदमी को अपना ही पैसा जमा करने के लिए अलग से पैसा देना होगा।
2. करेंट अकाउंट के कैश ट्रांजैक्शन पर आपको 20000 रुपये तक देने पड़ सकते हैं।
3. अकाउंट होल्डर को अपने खाते में मिनिमम बैलेंस मेन्टेन करके रखना पड़ेगा। ऐसा नहीं करते तो आपको उनको 100 रुपये + सर्विस टैक्स देंने पड़ सकते हैं। ये पैसे आपके होम ब्रांच की लोकेशन पर निर्भर करते हैं। अगर आपका खाता रूरल एरिया में है तो आपको 20 रुपये + सर्विस टैक्स ही देना होगा.
4. किसी अन्य बैंक के ATM से कैश निकालने पर पहले तीन ट्रांजैक्शन और SBI के एटीएम से निकालने पर पहले पांच ट्रांजैक्शन ही फ्री होंगे। लेकिन अगर आप अपने खाते में 25,000 रुपये या उससे ज्यादा बैलेंस मेन्टेन रखते हैं तो आप एसबीआई के एटीएम से ही चाहें जितनी बार मुफ़्त में पैसे निकल सकते हैं। अगर 1,00,000 रुपये का बैलेंस मेन्टेन करते हैं तो आप किसी भी बैंक के एटीएम से मुफ़्त में अनलिमिटेड बार पैसे निकाल सकते हैं।
5. 1,000 रूपए तक की UPI/USSD ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
केंद्र सरकार ने बैंको से साफ कह दिया है कि अगर उनकी कोई ब्रांच घाटे में चल रही है तो उसे बंद कर दें। चाहे वो देश में हो या विदेश में, ये भी कर सकते हैं कि उसे किसी और बैंक के साथ विलय कर ले, अपना घाटा पूरा करने के लिए बैंकों को अपने नॉन-कोर एसेट्स बेचने की भी सलाह दी गई है। नॉन-कोर एसेट्स का मतलब होता है बैंकों का किसी फर्म में हिस्सेदारी, या फिर कोई जॉइंट वेंचर।

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नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक की एम.डी. और चीफ़ एग्जीक्यूटिव उषा अनंत सुब्रमण्यम का कहना है कि पीएनबी भी यूटीआई और पीएनबी में लगी अपनी ईक्विटी को बेचने पर विचार कर रहा है।

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