पर्रिकर गोवा के मुख्यमंत्री पद की ले चुके है शपथ, कल ठोकेंगे दावा

Mar 15, 2017
पर्रिकर गोवा के मुख्यमंत्री पद की ले चुके है शपथ, कल ठोकेंगे दावा

भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर ने मंगलवार को चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार उन्हें गुरुवार को विधानसभा में शक्ति परीक्षण के जरिए बहुमत साबित करना होगा। राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने राजभवन में आयोजित एक समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

पर्रिकर ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्रियों वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी, जे.पी. नड्डा सहित शीर्ष पार्टी नेताओं और अन्य गणमान्यों की उपस्थिति में शपथ ली। पर्रिकर ने इसके पहले सोमवार को रक्षामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

पर्रिकर के साथ ही नौ मंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई। इनमें महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के सुदिन धवलीकर और मनोहर अजगांवकर तथा गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विजय सरदेसाई, विनोद पलिनकर व जयेश सालगांवकर और भाजपा के फ्रांसिस डिसूजा, पांडुरंग मडकैकर तथा निर्दलीय गोविंद गावडे व रोहन खाउंटे शामिल हैं।

पर्रिकर ने शपथ ग्रहण के बाद पत्रकारों से कहा कि भाजपा को मिला समर्थन गोवा के विकास के लिए है।

पर्रिकर ने कहा, “अगर आपके पास समर्थन था तो आप राज्यपाल के पास क्यों नहीं गए? भाजपा को सरकार बनाने के लिए समर्थन सिर्फ गोवा के विकास के लिए मिला है।”

पर्रिकर ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार बनाने का दावा पेश ही नहीं कर सकती, क्योंकि कोई भी विधायक कांग्रेस को समर्थन नहीं देना चाहता।

उधर कांग्रेस ने गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनावों में सर्वाधिक सीटें जीतने के बावजूद भाजपा द्वारा कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका न दिए जाने को लेकर मंगलवार को लोकसभा में भाजपा पर निशाना साधा।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने शुरू में कांग्रेस को सदन में यह मुद्दा उठाने की इजाजत नहीं दी, जिसके बाद कांग्रेस नेता के.एच. मुनियप्पा ने उस समय इस मुद्दे को उठाया, जब निचले सदन में रेल मंत्रालय के लिए अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुई।

मुनियप्पा ने कहा, “हमें जनादेश का सम्मान करना चाहिए। दुर्भाग्य से आज (मंगलवार) का दिन सदन के लिए एक काला दिन है।”

कांग्रेस ने गोवा की राज्यपाल पर एकपक्षीय होने का आरोप भी लगाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्रिकर को बधाई दी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मनोहर पर्रिकर और उनकी टीम को शपथ ग्रहण करने पर बधाइयां। गोवा को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मेरी शुभकामनाएं।”

इसके पहले सर्वोच्च न्यायालय ने बहुमत साबित करने के लिए गुरुवार को शक्ति परीक्षण कराने का निर्देश दिया।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई तथा न्यायमूर्ति आर. के. अग्रवाल की पीठ ने साथ ही कहा कि इसके लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं 15 मार्च तक पूरी कर ली जाएं, जिसमें निर्वाचन आयोग की तैयारी भी शामिल है।

गोवा विधानसभा में कांग्रेस के नेता चंद्रकांत कावलेकर ने राज्यपाल मृदुला सिन्हा के फैसले को चुनौती दी थी, जिन्होंने सरकार गठन के लिए भाजपा को आमंत्रित किया था।

शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की ‘संयुक्त शक्ति परीक्षण’ कराने की याचिका भी खारिज कर दी।

कांग्रेस ने यह मुद्दा संसद में भी उठाया और भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने मणिपुर और गोवा में जनादेश का सम्मान नहीं किया, तथा उसने सबसे बड़ी पार्टी न होने के बावजूद सरकार बनाने का दावा पेश किया।

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने पर्रिकर के मुख्यमंत्री बनने का बचाव किया। उन्होंने कांग्रेस के उस आरोप पर पलटवार किया, जिसमें उसने कहा था कि भाजपा ने मणिपुर और गोवा में सत्ता हथियाने के लिए धनबल का इस्तेमाल किया।

जेटली ने कहा, “कांग्रेस की शिकायत जरूरत से ज्यादा है। वे भाजपा पर गोवा में समर्थन हासिल करने के लिए धनबल के इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में उनकी याचिका भी असफल रही। उन्होंने लोकसभा में भी यह मुद्दा उठाने की कोशिश की।”

जेटली ने मंगलवार को अपने फेसबुक पेज पर लिखा, “यहां तक कि कांग्रेस ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा तक पेश नहीं किया। उन्हें सिर्फ 17 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। मनोहर पर्रिकर चूंकि 21 विधायकों के समर्थन का दावा पेश कर चुके थे, ऐसे में राज्यपाल 17 विधायकों वाले अल्पमत के दावेदार को सरकार बनाने के लिए आमंत्रण नहीं दे सकती थीं।”

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