OMG !! यहाँ सिर्फ 10 रुपए के स्टाम्प पर बिकती हैं लड़कियां

Jul 13, 2016

घटता लिंगानुपात और गरीबी इस प्रथा के फलने-फूलने का मुख्य कारण है बेशक भारत प्रथाओं और परम्पराओं का देश है. यहां अलग-अलग धर्म और जगहों पर अनेक प्रथाएं प्रचलित हैं. लेकिन क्या आपने किसी ऐसी प्रथा के बारे में सुना है, जिसमें लड़कियों और औरतों की खरीद फरोख्त होती हो. वह भी दस रुपए के स्टाम्प पर. अगर नही तो हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी ही प्रथा के बारे में जो कुप्रथा बन गयी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रथा मध्य प्रदेश के शिवपुरी में प्रचलित है और खूब फल-फूल रही है. यह धड़ीचा प्रथा के नाम से प्रचलित है. औरतों की खरीद फरोख्त की इसी प्रथा की शिकार कल्पना अब तक दो पति बदल चुकी है. और दो साल से दूसरे पति रमेश के साथ रह रही है. इसी तरह रज्जो पहले पति को छोड़कर अब दूसरे पति के साथ है।
दरअसल यहां प्रथा की आड़ में गरीब लड़कियों का सौदा होता है. यह सौदा स्थाई और अस्थाई दोनों तरह का होता है. प्रथा की आड़ में यहां एक तरह से औरतों की मंडी लगती है. इसमें क्षेत्र के पुरुष अपनी पसंदीदा औरत की बोली लगाते हैं।

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सौदा तय होने के बाद बिकने वाली औरत और खरीदने वाले पुरुष के बीच एक अनुबन्ध किया जाता है. यह अनुबंध खरीद की रकम के मुताबिक 10 रुपये से लेकर 100 तक के स्टाम्प पर किया जाता है. घटता लिंगानुपात और गरीबी इस प्रथा के फलने-फूलने का मुख्य कारण है।

यहां हर साल करीब 300 से ज्यादा महिलाओं को दस से 100 रूपये तक के स्टांप पर खरीदा और बेचा जाता है. स्टांप पर शर्त के अनुसार खरीदने वाले व्यक्ति को महिला या उसके परिवार को एक निश्चित रकम अदा करनी पड़ती है।

रकम अदा करने व स्टांप पर अनुबंध होने के बाद महिला निश्चित समय के लिए उसकी बहू या व्यक्ति की पत्नी बन जाती है. मोटी रकम पर संबंध स्थायी होते हैं, वरना संबंध समाप्त. अनुबंध समाप्त होने के बाद मायके लौटी महिला का दूसरा सौदा कर दिया जाता है. अनुबंध की राशि समयानुसार 50 हजार से 4 लाख रूपये तक हो सकती है।

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