गिन्नी माही: हिपहॉप और रैप की धुन में दलितों की नई आवाज

Aug 30, 2016
गिन्नी माही: हिपहॉप और रैप की धुन में दलितों की नई आवाज

जालंधर। आप गुरकंवल भारती को भले ही न जानते हों लेकिन गिन्नी माही को जरूर जानते होंगे।

के जालंधर की 17 साल की गुरुकंवल उर्फ गिन्नी उस वक्त अपने गानों से ों की आवाज उठा रही थीं जब गुजरात के ऊना में दलितों के प्रदर्शन चल रहा था।

गिन्नी पंजाब के जाटव समुदाय से वास्ता रखती हैं और वे इसे अपना गर्व समझती हैं। उनके गाने की एक लाइन है – ‘ कुर्बानी देनो डरदे नहीं, रेंहदें है तैयार, हैगे असले तो वड डेंजर चमार।’ जिससे वो फेमस हो गईं।

यूट्यूब की सनसनी हैं गिन्नी

देश में दलित पॉप की नई आवाज गिन्नी फिलहाल यूट्यूब की सनसनी बनी हुई हैं। उनके 1 लाख फॉलोअर्स हैं।

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गिन्नी बताती हैं कि ‘डेंजर चमार गाने का ख्याल उन्हें तब आया जब उनकी एक क्लासमेट ने उनकी जाति पूछी और जब उसे पता चला कि वो एससी कैटेगरी से हैं तो उनकी क्लासमेट ने कहा यार चमार बड़े डेंजरस हो गए हैं।’

बाबा साहब को मानती हैं आदर्श

बाबा साहब भीम राव आंबेडकर को अपना आदर्श मानने वाली गिन्नी बाताती हैं कि बाबा साहब ने मनुष्य के अधिकारों और समानता के लिए बोलते थे, वो सिर्फ इसलिए नहीं कि वो एक दलित थे बल्कि इसलिए कि वो भारतीय थे, एक हिन्दुस्तानी।’

गिन्नी कहती हैं कि ‘बाबा साहब ने भारत के लिए बात की। हमें अधिकार दिए, हमें सशक्त बनाया और मैं उनके लड़ने के जज्बे को सलाम करती हूं।’

गिन्नी अपने असल नाम में ‘भारती’ अपनी हिन्दुस्तानी पहचान बताने के लिए लगाती हैं।

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बता दें कि दलित समुदाय से वो पहली गायक नहीं है लेकिन शायद वो पहली हैं जिन्हें इतना बड़ा श्रोतावर्ग मिला है।

गिन्नी ने बताया चमार का मतलब

एक श्रोता को अपनी पहचान बताते हुए गिन्नी ने हाल ही में कहा था कि चमार क्या है? च से चमड़ा, मा से मांस और र से रक्त। हम सभी चमड़े, मांस और खून से बने हुए हैं।

बता दें कि गिन्नी ने 7 साल की उम्र से शुरू किया था। वो म्यूजिक ब्रांड चमार पॉप के लिए गाती हैं। गिन्नी पंजाबी लोकगीत, रैप और हिप हॉप गाती हैं।

यहां है गिन्नी का घर

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गिन्नी का घर ऐसी जगह है जहां मात्र जातिवादी कारणों से डेढ़ किलोमीटर के क्षेत्र में 7 श्मशान घाट हैं। गिन्नी समाज में दलितों से होने वाले भेदभाव के लिए लड़ना चाहती हैं।

यहां देखिए उनके गाने का वीडियो- 

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