व्यापार का साधन नहीं बनने देंगे गंगा को

Jun 02, 2016

महानगर कांग्रेस कमेटी ने केन्द्र सरकार के गंगाजल बेचे जाने की फैसले के विरोध में एकत्र होकर जबरदस्त प्रदर्शन किया.

कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने मां गंगा के जल को डाक द्वारा बेचे जाने की निन्दा की. महानगर कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष अंशुल श्रीकुंज ने कहा कि मा गंगा अनादिकाल से आस्था की केन्द्र है.

केन्द्र सरकार की नीतियों के चलते मां गंगा के जल को बेचे जाने का फैसला सरासर हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा हैं. उन्होंने कहा कि मां गंगा के आचमन से ही कष्टों का निवारण हो जाता है. ऐसे में केन्द्र सरकार जनविरोधी नीतियां अपनाकर हिन्दुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने पर अमादा हैं.

उन्होंने कहा कि मां गंगा को व्यापार का साधन नहीं बनने दिया जायेगा. केन्द्र का यह फैसला बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. ब्लॉक अध्यक्ष भारत भूषण तनेजा, तरूण नैयर ने कहा कि गंगा में हजारों लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाकर पुण्य कमाते हैं लेकिन केन्द्र सरकार मां गंगा के जल को बेचने की बात कर रही है.

केन्द्र सरकार गंगा को व्यापार का साधन बनाने के प्रयास कर रही है जो कि बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. आशीष चौधरी, महेश प्रताप राणा ने कहा कि केन्द्र का फैसला सरासर गलत हैं. कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने इस दौरान गंगाजली निशुल्क लोगों को वितरित कर गंगा की आस्था के प्रति संदेश दिया.

 

गंगाजल बेचने की योजना से उखड़े संत
संत समाज ने केंद्र सरकार की डाक के माध्यम से गंगा जल बेचे जाने की योजना का जबरदस्त विरोध किया है. संतों ने प्रधानमंत्री को योजना वापस न लिए जाने पर जंतर मंतर पर धरने की चेतावनी भी दी। भूमा निकतेन में आयोजित प्रेस वार्ता में भूमापीठाधीर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि गंगा देश की पहचान है. करोड़ों देशवासी गंगा के प्रति श्रद्धा एवं विश्वास रखते हैं.

केंद्र सरकार की गंगा जल बेचे जाने की योजना से संतों व श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं. स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि जिस गंगा मां को पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भगीरथ की कई पीढ़ियां जप तप करते-करते समाप्त हो गयी.

अंत में राजा भगीरथ ने मां गंगा को लाने के लिए कठोर तप किया. उसके बाद मां गंगा पृथ्वी पर आयी और राजा सागर के साठ हजार पुत्रों को मुक्ति दी.

मां गंगा मोक्ष दायिनी तथा समस्त जग की पालनहार है. गंगा को व्यापार की वस्तु नहीं बनने दिया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी नमामि गंगे का नाम जपने वाली सरकार आज गंगाजल को बेचने पर उतारू हो गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तुरंत डाक द्वारा गंगा जल बेचने की योजना व केन्द्रीय मंत्री के बयान को तत्काल वापस लेना चाहिए. अन्यथा भारत का समस्त संत समाज दिल्ली के जंतर मंतर पर केंद्र सरकार के खिलाफ विशाल आंदोलन करेगा. जिसका खमियाजा सरकार को भुगतना पड़ सकता है. महामण्डलेश्वर स्वामी प्रेमानंद महाराज, श्रीमहंत विनोद गिरी महाराज ने कहा कि गौमुख से लेकर गंगा सागर तक गंगा को निर्मल बहना चाहिए। इस ओर केंद्र सरकार ध्यान नहीं दे रही है.

दो साल से बनी केंद्र की मोदी सरकार आए दिन नमामि गंगा के नाम पर संतों को बरगला रही है. अभी तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

एक नया शिगूफा छोड़ दिया गया है कि ऑनलाइन गंगा जल बेचा जाएगा. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संतों की मांग का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है.

सप्तऋषि क्षेत्र सहित हरिद्वार के दर्जनों जल विहीन घाटों पर यदि एक सप्ताह के अंदर पर्याप्त मात्रा में जल की धारा को नहीं छोड़ा गया तो हरिद्वार का संत समाज राज्य सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन प्रारंभ करेगा.

इस बात को लेकर भारत का संत समाज प्रधानमंत्री के इस फैसले से आहत है. इस अवसर पर महंत साधनानंद, महंत सत्यवतानंद, महंत विनोद महाराज, स्वामी पूर्णानंद गिरी, महंत सच्चिदानंद, साध्वी रंजना देवी, स्वामी गौरव, राजेंद्र शर्मा, देवराज तोमर, पंडित अधीर कौशिक आदि संतों ने भी गंगा जल बेचे जाने का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से योजना वापस लेने की मांग की.

वरना होगा देशव्यापी आंदोलन : श्रीकांत
केन्द्र सरकार की गंगाजल डाक द्वारा  लोगों के घर भिजवाने के नाम पर गंगाजल बेचने की योजना का अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीकांत वशिष्ठ ने विरोध करते हुए कहा कि हिन्दुओं के हितों का दम्भ भरने वाली मोदी सरकार को उक्त योजना को लेकर खेद व्यक्त करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हिन्दुओं की आस्था पर कुठाराघात करने की योजना को किसी भी स्तर पर सिरे नहीं चढ़ने दिया जाएगा. मंदिरों का प्रसाद, गंगा का जल आस्था, श्रद्धा के प्रतीक है इन्हें व्यावसायिक नहीं बनाया जा सकता. गंगा तटों व मंदिरों में श्रद्धालु आस्था श्रद्धा से दान करते हैं लेकिन यह बेचने की वस्तु नहीं बनने दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने इस योजना को लेकर खेद नही जताया तो पूरे देश के सभी तीथरे के पुरोहितों व देशकर के श्रद्धालू हिन्दुओं में अलख जगाकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जाएगा.

कलियुग की प्रत्यक्ष देव है गंगा : ब्रह्मस्वरूप

श्री जयराम आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने केन्द्र सरकार की गंगाजल डाक द्वारा बेचने की कथित योजना का प्रतिकार करते हुए कहा कि हिन्दूवादी होने का दम्भ भरने वाली भाजपा यदा कदा हिन्दुओं की भावनाओं पर ही कुठाराघात करती रही है. उन्होंने कहा कि गंगा केवल नदी नहीं है बल्कि गंगा कलियुग में सूर्य, चन्द्र, तुलसी, गीता, गौ के समान ही प्रत्यक्ष देवता है.

गंगा के घाट देव मंदिर है जहां लाखों-करोड़ों श्रद्धालु आस्था के साथ आते हैं, तीर्थ पुरोहित, पुजारी यात्रियों को गंगा का अचमान निशुल्क प्रदान करते हैं. ऐसे में गंगाजल को बेचने की योजना शर्मनाक है. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को अपने इस बयान को वापस लेकर हिन्दू मात्र से माफी मांगनी चाहिए.

 

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार विशुद्ध रूप से व्यवसायियों की हितैषी सरकार है जिसे आम जनमानस की भावनाओं से कुछ लेना देना नहीं है इसीलिए इस प्रकार की योजना बनाई जा रही है. अभी जहां सरकार केवल डाक द्वारा गंगाजल लोगों के घरों में भेजने की बात कर रही है वहीं योजना के आंशिक रूप से भी सफल होने पर बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपने ब्रांड के नाम से पैक्ड गंगाजल भारी कीमत पर बेचने लगेगी, कोई अतिशयोक्ति नहीं कि केन्द्र की भाजपा सरकार फायदे का सौदा देखकर गंगा में प्रति डुबकी लगाने का शुल्क भी निर्धारित कर दे।
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