ताजमहल के ऊपर 3 कविताएं: तकदीर है मगर, किस्मत नहीं खुलती…

Feb 06, 2016

एक ताजमहल, तीन कवि कपड़ों की धुलाई
अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा ताजमहल के ऊपर 3 कविताएं-

1. कुंवारे की कविता –
तकदीर है मगर, किस्मत नहीं खुलती…
ताजमहल बनाना चाहता हूं,
मगर मुमताज नहीं मिलती।

2. प्रेमी की कविता –
तकदीर है मगर किस्मत नहीं खुलती…
मुमताज मिल गई है, मगर शादी नहीं करती।

3. शादीशुदा की कविता –
तकदीर है मगर किस्मत नहीं खुलती …
ताजमहल बनाना चाहता हूं,
मगर मुमताज नहीं मरती।
सचिन गगोरनी, इंदौर

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